Monday, January 21, 2019
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तीसरी पास पहाड़ी कोरवा को प्राधिककरण का अध्यक्ष तो बना दिया लेकिन इस काम के लिए …..अज्ञानता का फायदा उठाकर करते रहे….पढ़िये क्या है खबर ?

जशपुर मुनादी।।

 

 

यह तस्वीर बगीचा विकास खंड के पहाड़ी कोरवा वन ग्राम मधुपुर का है। यह व्यक्ति जो लूंगी और बनियान पहनकर आपके सामने खड़ा है, जिसका नाम -भक्तू राम, पिता – खरसू राम ,जाति – पहाड़ी कोरवा है। जो पहाड़ी कोरवा वन ग्राम मधुपुर का रहनेै वाला है। जो तीसरी कक्षा तक की पढ़ाई की है। जिसे सन् 2010 से पहाड़ी कोरवा एवं बिरहोर विकास प्राधिकरण जशपुर का अध्यक्ष बनाया गया है। जिसकी अशिक्षा का फायदा उठाकर पहाड़ी कोरवाओं के विकास के नाम से आये करोड़ों की राशि का हेरा-फेरी करते आ रहे हैं।
यह बात की जानकारी कोरवा समाज के प्रदेश अध्यक्ष राम प्रसाद साय कोरवा के द्वारा पहाड़ी कोरवा वन ग्राम मधुपुर पहुँचने पर पहाड़ी कोरवा एवं बिरहोर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री भक्तू राम से मिलने से प्राप्त हुई है। इनको पुछने पर इनके द्वारा बताया गया कि हमें किसी भी चीज या योजना की जानकारी नहीं दी जाति है। हमें कभी-कभी बैठक में,और कभी-कभी चेक में दस्तखत करने के लिए बुला कर यह कहा जाता है कि ये चेक में तुमको दस्तखत करना है। और कोई चीज को बिना बताये दस्तखत करा कर मुझे घर भेज दिया जाता है। और मुझे कौनसी कागज में दस्तखत कराया जाता है,जिसका मुझे कुछ भी मालूम नहीं होता है।
और उनसे आगे उनके बच्चों के पढाई के बारे में पुछने पर बताया गया कि उनके दो लड़के हैं। उनके बड़े लडक़ा नेहरू राम पिता श्री भक्तू राम वर्ष 2016-17 में पत्थलगांव शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ाई करता था। वहां एक बार फैल हो जाने पर स्कूल से टी0सी0 काटकर निकाल दिया गया। जिससे अपने पुत्र को शासकीय बालक हायर सेकेंडरी स्कूल बगीचा में पढ़ाने के लिए लेकर आये। यहाँ भी स्कूल में एडविसन करने से इनकार कर दिये। जिससे मेरे द्वारा उनके लड़के नेहरू राम को पुछने पर बताया कि वह और पढ़ना चाहता है।
एक ओर तो सरकार बड़ी-बड़ी डींगे मारता है कि हम पहाड़ी कोरवाओं को पांचवीं-आठवीं पास बच्चों को खोज-खोज कर सरकारी नौकरी दे रही है। और दूसरे तरफ उन्हें कई तरह के हथकंडा अपनाकर उन्हें पढ़ाई से,सरकारी नौकरी से और कई तरह के शासकीय सुविधाओं से वंचित कर रही है। ये तो प्राधिकरण के अध्यक्ष के पुत्र का हाल है,आप ही बताइए और परिवारों का क्या हाल होगा।
और तो और एक विडंबना यह भी है कि उसी गांव के पहाड़ी कोरवा विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष होते हुए भी वहां के पहाड़ी कोरवाओं का जाति प्रमाणपत्र नहीं बन पा रहा है।

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