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सोची थी पढ़ लिखकर नौकरी करुँगी, माँ का सहारा बनूँगी, भ्रष्ट अधिकारिओं ने तो जीने लायक भी नहीं छोड़ा

  जशपुर मुनादी   अब मैं जीकर करूंगी क्या?अगर जिंदा रह भी गयी तो अपनी बूढ़ी माँ और छोटे भाई का परवरिश कैसे करूंगी ?यहां योग्यता नही प्रशासन को केवल पैसा चाहिए और हमारे पास पैसे नही है इसलिए मेरी योग्यता को नकारकर आर्थिक रूप से योग्य महिला का चयन कर लिया गया।

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