Wednesday, December 19, 2018
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मौत को मना नहीं कर सकते, रोक तो सकते हैं न ? यही काम वर्षों से कर रहा ये शख्स, कौन है पढ़िए

जशपुर मुनादी

यकीन मानेंगे ?जशपुर जिले का एक शख्स कई सालों से ‘मौत”को  रोकने का काम कर रहा है और मौत के खिलाफ लड़ने वाले जांबाज युवाओं को इसके लिए तैयार भी कर रहा है। मौत से लड़ना आसान है लेकिन मौत पर काबू पा लेना शायद मुश्किल ही नही नामुमकिन है लेकिन  नामुमकिन को मुमकिन में बदलने का  साहश जशपुर जिले का केसर हुसैन दिखा रहा है ।केसर हुसैन शिक्षक हैं और शिक्षक की नौकरी के अलावा ये मौत को जीतकर लोगों में जिंदगी बांटने का काम कर रहे हैं …..
  आपको पता है जशपुर जिले के अधिकांश क्षेत्रों को ‘नागलोक” के नाम से जाना जाता है । सर्प की अधिकता और अज्ञानता के चलते यहाँ सर्पदंश की घटना एक जमाने में आम थी ।याने किसी गाँव मे अगर सर्पदंश से किसी की मौत हो गयी तो लोग आश्चर्य नही करते थे बल्कि इसे आम घटना मानकर लोग दूसरे काम मे लग जाते । आंकड़ों पर गौर करे तो जशपुर जिले में 2001 में सांप से मारने वालों का मृत्यु दर 89 था याने मई से जुलाई तक मे 89 मौतें हो तो मंजर क्या होगा यहां का अंदाजा लगाया जा सकता है ।आज भी यहां के लोग सांपों को “रेंगती मौत” का नाम देते हैं । इन परिस्थितियों में यह जरूरी हो गया था कि कोई फरिश्ता बनकर आये और रेंगती मौत से यहां के लोगों को निजात दिलाये क्योंकि वह एक ऐसा दौर था जब सरकार भी मौत के इन आंकड़ों से बेपरवाह थी औपचारिकता के तौर पर थोड़े बहुत प्रयास जरूर किये गए लेकिन मौत के आंकड़ों पर ज्यादा कुछ असर हो नही पाया । ऐसे में 2011 में केसर हुसैन नाम के शिक्षक ने रेंगती मौत से लड़ने का बीड़ा उठाया । इनका दावा है कि हर साल मौत के आंकड़ों में तेजी से कमी आ रही है 89 के मृत्यु दर के मुकाबले अब यह आंकड़ा 22 या 23 के दर में सिमट गया है ।
   केसर हुसैन ने बताया कि सांप से खेलना उनके बचपन का शौक है । बचपन से ही वह खेल खेल में सांप को पकड़ लेते थे और उसी सांप से अपने साथियों को डराते ।उन्हें शायद यह नही पता था कि एक दिन यही खेल और मजाक उनके जीवन का हिस्सा बन जाएगा। जिले में सांपों से हो रही लोगो की मौत का सिलसिला रोकने के लिए इन्होंने 2011 में जी एन डब्लू इस संस्था बनाया  जिसके वह खुद मुखिया बने और करीब 6 से 7 लोगो को अपनी टीम का हिस्सा बनाया ।
      केसर हुसैन बताते है कि शुरुआत में उन्हें बहुत कुछ सीखना पड़ा । शुरू से इसमें रुचि लेने के कारण सांपों को पकड़ने की कला तो इनको शुरू से आती थी लेकिन विषधर ओर खतरनाक सांपों को कैसे पकड़ा जाय इसे जानने और सीखने के लिए उन्होंने टेलीविजन शो का सहारा लिया धीरे धीरे जब उनका आत्मविश्वाश बढ़ने लगा तो 2014 में उनकी अगुआई में उनकी टीम ने मौत के आंकड़ो में कमी लाने की शपथ ली ।उन्होंने शपथ लिया कि अब लोगो को जैसे भी हो भुजंगों के कहर को रोकना है। इनसे होने वाली मौतों के आंकड़ो  को कम करना है ।

सक्रियता के साथ 2014 मे आये जीएंनब्लूएस की टीम ने सांपो का रेस्क्यू करना शुरू किया ।सोशल मीडिया के जरिये लोगो तक यह संदेश भेजा गया कि सांप अगर दिखे तो उन्हें मारा न जाय बल्कि उन्हें सही ठिकाने पर छोड़ा जाय। इसके लिए सबसे पहले इन्होंने स्कूली बच्चों को फोकस किया।स्कूल जाकर स्कूली बच्चों को सांपों के बारे में बताना शुरू किया कि इनसे बचा कैसे जाय ओर इन्हें मारने के बजाय इनसे मित्रता कैसे की जाय ।

उन्होंने बताया कि रेस्क्यू के लिए अब इन्हें जिले के कोने कोने से बुलाया जाता है ।सोशल मीडिया के जरिये और स्कूली बच्चों के माध्यम से संदेश देने का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि अब जहां भी जिस घर मे सांप देखा जाता है वहां के लोग इन्हें ओर इनकी टीम को फोन पर काल करके बुलाते है ।वहां सांप का रेस्क्यू करने के बाद वहां मौजूद लोगों को भी सांप से जुड़ी जानकारियां दी जाती हैं उन्हें यह बताया जाता है कि हर सांप जहरीला नही होता और न ही हर सांप के काटने से मौत होती है ।उन्हें यह भी बताया जाता है कि सांप उनपर हमला क्यों और किन परिस्थितियों में करता है और उनसे कैसे बचा जाए।

केसर हुसैन का दावा है कि इनके इस अभियान से सांपों से होने वाले मृत्युदर में भारी कमी आई है ।वर्तमान में जहाँ मृत्यु दर 22 हो गया है वही आगामी 2020 तक यह डर घटकर 10 हो जाएगा

 

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