Tuesday, January 16, 2018
Home > Slider > अपने बीमार साथी के लिए चलाया मिशन आनंद, जूटा रहे हैं पैसे, सीखिए इन शिक्षकर्मिओं की एकता से

अपने बीमार साथी के लिए चलाया मिशन आनंद, जूटा रहे हैं पैसे, सीखिए इन शिक्षकर्मिओं की एकता से

 

कांसाबेल मुनादी

जी हां ये सच है कि महज चंद घण्टों में जिले के शिक्षक पंचायत नगरीय निकाय मोर्चा के ब्लॉक इकाई कांसाबेल के शिक्षाकर्मियों ने अपने ही साथियों के इलाज के लिए हजारों रुपये जमा कर लिया। सुनने में तो अजीब लगा रहा होगा पर इस हकीकत के पीछे का राज है शोशल मिडिया।
जिला मिडिया प्रभारी मो.अफरोज खान व सैय्यद सरवर हुसैन ने संयुक्त रूप से बताया कि जैसे ही शक्रवार को कांसाबेल के शिक्षाकर्मियों का एक वाट्सएप ग्रुप (शि.पं.न.नि.मोर्चा KBL) में ये खबर आई कि विकासखंड के अपने ही बीच के शिक्षाकर्मी साथी आनंद लाल भगत जो कि सहायक शिक्षक पंचायत के पद पर प्राथमिक शाला सेमरकछार में कार्यरत हैं जो कुछ दिनों से बीमार हैं, जाँच में पता चला कि पेट में पानी भर गया है तथा पित्त की थैली में पथरी हो गया है साथ ही साथ तिल्ली भी बढ़ गई है। जिनका ईलाज रायगढ़ के संजीवनी हॉस्पिटल में चल रहा है। आगे के ईलाज हेतु पीड़ित के परिजन को पैसे की सख्त जरुरत है।फिर क्या थी ? खबर पढ़कर सभी ने अपने साथी के ईलाज के लिए बढ़ चढ़कर हिस्सा लेना शुरू कर दिया और देखते ही देखते 40 हजार रुपया का इंतजाम कुछ ही पलों में हो गया। इस पूरे अभियान को *मिशन आनंद* नाम दिया गया था।

नेट बैंकिंग बनी संजीवनी

मोर्चा ग्रुप में जैसे ही आनंद लाल भगत जी का खाता नंबर पोस्ट किया गया ग्रुप के कुछ साथियों ने फौरन ही नेट बैंकिंग का इस्तेमाल करते हुए सम्बंधित के खाते में पैसा डाल दिया जिसकी स्क्रीन शॉट भी ग्रुप में पोस्ट कर दी गई। इस पूरे अभियान की खास बात ये रही कि कुछ शिक्षाकर्मी साथी जो ब्लॉक के बाहर थे उन्होंने भी इस पुनीत कार्य में अपना योगदान दिया
छत्तीसगढ़ पंचायत नगरीय निकाय के प्रदेश प्रवक्ता विवेक दुबे जो कि शासकीय उमावि बटईकेला में पदस्थ हैं। वे वर्तमान में बिलासपुर में विभागीय बीएड कर रहे हैं,उन्होंने बिलासपुर से ही अपना सहयोग राशि नेट बैंकिंग के माध्यम से जमा किया। श्री दुबे ने बताया कि इस नेक काम में शामिल होकर मैं अपने आपको खुशनसीब समझ रहा हूँ।सभी साथियों ने आज जो कार्य किया है वो बेहद ही प्रशंसनीय है। हमारे कुछ पैसों के सहयोग से यदि किसी व्यक्ति की जान बच जाती है तो इससे बढ़कर जीवन में कोई काम नहीं।

शिक्षाकर्मियों का दर्द खुलकर आया सामने

शिक्षक पंचायत नगरीय निकाय के ब्लॉक संचालक नरोत्तम सिंह पटेल एवं सिलन साय पैंकरा ने संयुक्त रूप से शिक्षाकर्मियों के दर्द को साझा किया। उन्होंने बताया कि शिक्षाकर्मी एक ऐसा नाम है जिसमे कम वेतन,अस्थाई नौकरी,और पेंशन की कोई गारंटी नहीं जैसे तोहफा से राज्य शासन ने नवाजा है। जहाँ कर्मचारी यदि गंभीर बीमारी की गिरफ्त में आ जाये और पास में पैसा न हो तो उसका भगवान ही मालिक है। मौजूदा दौर में जिस तरह के हालात बन रहे हैं उसमें शिक्षकों का दर्जा तेजी से गिर रहा है। सच्चाई तो ये है कि नए शिक्षाकर्मियों का वेतन अब पुराने चपरासी से आधा है। समाज में आज हर चीज को पैसे से तोला जाने लगा है। ऐसे समाज में शिक्षक की इज्जत कैसे होगी?अफ़सोस यह है कि बहुप्रचारित “बच्चों की मुफ़्त एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार कानून” से भी ये हालात ज्यादा बदलने वाले नहीं हैं।इस कानून में शिक्षकों के लिए न्यूनतम योग्यता और वेतनमान की बात तो है,लेकिन वह कितना होगा,इसका निर्धारण सरकार पर छोड़ दिया है।
ब्लॉक संचालकों ने इस पुनीत कार्य के लिए सभी साथियों का आभार व्यक्त किया और कहा कि ये हमारी एकता का परिचय है कि आज हमारा *मिशन आनंद* बहुत ही कम समय में कामयाब हो गया।
इस पुरे अभियान में नरोत्तम सिंह पटेल,सिलन साय पैंकरा,प्रेम शंकर यादव, सुरेश कुमार साय,ब्रजेश पैंकरा,धनवंत कुमार यादव,राजकुमार पैंकरा,अमित कुमार सारथी, मेघश्याम सिंह पैंकरा,नोनन्तुस लकड़ा,कीर्तक यादव,नेमचंद छत्तर,अनिल यादव,घनश्याम साय, यमुना प्रसाद दानी,ठाकुर दयाल सिंह,जयप्रकाश भगत,शेखर सिंह राठौर,नितेश सिन्हा,असगर अली,सुरेश सनमानी,रोशन लाल सारथी, रविकिरण डनसेना,पवन साय सहित सैकड़ों शिक्षाकर्मियों का अहम योगदान रहा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *