Thursday, January 18, 2018
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मीडिया और सरकार की जुगलबंदी की काट खोज रही शिक्षाकर्मी संघ, सोशल मीडिया पर बनाएगी पकड़

छत्तीसगढ़ मुनादी ।।

 

अपने आंदोलन में मीडिया की कथित बेरुखी से परेशान शिक्षाकर्मी सोशल मीडिया या मीडिया के दूसरे माध्यमों में अपनी पकड़ बनाने में लग गए हैं। उनका सोचना है कि अपनी पहुंच आम लोगों तक हो ऐसी किसी माध्यम का सहारा लेना होगा ताकि अबकी बार कोई आंदोलन हो तो लोगों की नजर में वे खलनायक साबित न हों, जैसा इस बार उनके साथ हुआ।

शिक्षा कर्मियों के आंदोलन के तुरंत बाद शुरु हुआ सरकारी नारा 14 साल बेमिसाल सरकारी साजिश की कहानी कह रही है । सरकार ने किस तरह से आंदोलन को दबाने मीडिया का सहारा लिया यह इसका जीता जागता उदाहरण है। लोगों को यही लग रहा है कि मीडिया हमारी नही सिर्फ सरकार की सुनेगी। आखिर ऐसा माहौल क्यों बन रहा है जो मीडिया के खिलाफ है कोई राजनीतिक पार्टी के नहीं।

जब शिक्षाकर्मियों का आंदोलन अपने चरम पर थी, मीडिया को शिक्षाकर्मी आंदोलन से ध्यान हटाने के लिए उन्हें 14 साल बेमिसाल के नाम पर विज्ञापन दिए जा रहे थे। यह एक तो सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग है और दूसरी और एक आंदोलन को कुचलने की कुटिल साजिश थी। जिस तरह से इतने बड़े आंदोलन को कथित मुख्यधारा की मीडिया कवरेज नहीं दे रही थी इससे पता चलता है कि रमन सिंह का 14 साल बेमिसाल नही मीडिया को मैंनेज करने का तरीका बेमिसाल था। रमन सिंह के यशगान से युक्त यह नारा हर कोई गाने लगा। सरकार चाहती थी कि इन आंदोलन को कुचलने के साथ इस का प्रभाव आम लोगों तक न पहुंच सके इसलिए मीडिया को डाइवर्ट किया जाय। इसीलिए उन्होंने मीडिया में 14 साल बेमिसाल का एक सरकारी विज्ञापन जारी कर दिया। इसे दो काम हो गए पहला तो मीडिया उपकृत हो गया और सरकार के यशगान कां कीर्तन करने लगाऔर दूसरा इन आंदोलन को कवरेज नहीं मिल सका।

सरकार ने पहले तो आम आदमी पार्टी का एक स्लोगन चुराया। 14 साल बेमिसाल, याद कीजिए कुछ दिन पहले दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार ने 2 साल बेमिसाल करके एक नारा शुरू किया था। उसी तर्ज पर रमन सरकार ने भी 14 साल बेमिसाल का नारा मीडिया में शुरू किया। इसके मंत्री सभी जगह प्रेस कांफ्रेंस कर सरकार के 14 साल के उपलब्धियों को बता रहे हैं।

पहले CD कांड फिर शिक्षाकर्मी आंदोलन

जिसतरह से इस आंदोलन को न के बराबर दिखाया और सरकारी पक्ष को बढ़ा चढ़ाकर पेश करते रहे इससे मीडिया खासकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की काफी फजीहत हुई है। लोग मुंह खोलकर बिकने का आरोप लगा रहे हैं। सोशल मीडिया में तो मुख्यधारा की मीडिया सबके निशाने पर है। इससे पहले CD कांड जिसमें सरकार के मंत्री फंसे भी थे ,उसमें सरकार का पक्ष जोर शोर से रखकर भी मीडिया ने अपना खूब फजीहत कराया था। इस मामले में भी अब यही हो रहा है। एक चैनल ने तो बाकायदा जांच करके यह घोषित भी कर दिया था कि CD फर्जी है। हालांकि उसने यह नहीं बताया कि उसे असली CD मिली भी है या नहीं।

 

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