Thursday, April 19, 2018
Home > Slider > ये तो सराफत की हद है भाई, प्लेसमेन्ट कर्मचारी अधिकारियो के घर दे रहे सेवा, जनता हो रही हलाकान, और तो और जनता के खेवनहार कार्यालय तक आना भी नहीं समझते मुनासिब,

ये तो सराफत की हद है भाई, प्लेसमेन्ट कर्मचारी अधिकारियो के घर दे रहे सेवा, जनता हो रही हलाकान, और तो और जनता के खेवनहार कार्यालय तक आना भी नहीं समझते मुनासिब,

सारंगढ़ मुनादी

नगर की जनता में त्राहि त्राहि मची है पर साहब को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। फर्क सिर्फ इस बात पर पड़ता है कि फ़र्ज़ी वाड़ा करने में कई बार रोड़े पड़ जाते है जिससे कमीशन खोरी करने में परेशानी बस नहीं होनी चाहिए कैसे कैसे करके तो कामाइबक जरिया बनाना पड़ता है तब जाकर माल अंदर हो पाता है भाई इसके लिए भी दिमाग और न जाने कितनी मेहनत करनी पड़ती है।

जिले के सारंगढ़ नगर पंचायत का यही किस्सा है जानने के लिए आगे पढ़े की नगर में आखिर क्या क्या हो रहा है और आम जनता कैसे इनके बीच पीस रही है।

सारंगढ़ नगर पालिका की बदहाल व्यवस्था से शहरी क्षेत्र की साफ-सफाई व्यवस्था चरमरा गई है। चौक चौराहो और मक्कड़ में कचरो को नही रखने की हिदायत के बाद भी शहरवासियो के द्वारा धड़ल्ले से कचरा डम्प किया जा रहा है उनको कोई रोकने वाला नही है। वही डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन करने के लिये आया डस्टबिन को नगर पालिका 8 माह बीतने के बाद भी वितरण नही कर पाया है। इन सभी समस्याओ की जड़ नगर पालिका के सीएमओ और उपयंत्री है जो कि सारंगढ़ मुख्यालय में निवास नही करते है। जिसके कारण से कर्मचारियो पर कोई पकड़ नही हो पा रही है और मनमर्जी का दौर चल रहा है। विशेष बात यह है कि प्लेंसमेंट के नाम पर दर्जन भर से अधिक कर्मचारियो को नगर पालिका मानदेय देती है किन्तु ये कर्मचारी अधिकारियो और नेताओ के घरो पर घरेलू काम कर रहे है। इस कारण से स्वच्छता के नाम पर आया फंड़ को सिर्फ कागजो पर खर्च कर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर दिया जा रहा है नगर पालिका सारंगढ़ को अंधेर नगरी चौपट राजा का नाम दिया जा रहा है। इसका कारण यह है कि इस निकाय में सा -सफाई के नाम पर शासन के द्वारा मोटी रकम सारंगढ़ नगर पालिका को दिया जा रहा है किन्तु शहर को साफ और स्वच्छ रखने के स्थान पर सिर्फ कागजी खानापूर्ति हो रही है। चौक चौराहो पर मक्कड़ो पर कचरो का ढ़ेर पड़ा हुआ है। जब नगर पालिका के द्वारा डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन किया जा रहा है तो उसके बाद भी पुराने नगर पंचायत क्षेत्र में जहा पर डस्टबिन वितरण किया गया है वहा पर चौक चौराहो पर कचरा का ढ़ेर साफ साफ देखा जा सकता है। अगर डस्टबिन बांटा गया है और डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन किया जाता है तो आखिर मक्कड़ो मे कचरा क्यो? इस संबंध में जब सारंगढ़ नगर मे कई चौक चौराहो का निरीक्षण किया गया तो पाया गया कि कई मोहल्ले में अभी तक डस्टबिन का वितरण नही किया गया है। जबकि स्वच्छ सारंगढ़ का पहला काम डस्टबिन का वितरण होना था किन्तु निष्क्रिय सीएमओ और उपयंत्री के साथ निर्वाचित जनप्रतिनिधि नगर पालिका अध्यक्ष का रवैया स्वच्छ सारंगढ़ के प्रति शून्य ही है। जिसके कारण से सारंगढ़ शहर के विभिन्न चौक चौराहो में कचरा का ढ़ेर साफ देखा जा सकता है। उल्लेखनीय है कि सारंगढ़ नगर पालिका प्रदेश का सबसे पुराना नगर पालिका है तथा यहा पर लगभग 70 से अधिक कर्मचारी कार्यरत है किन्तु नगर पालिका के द्वारा स्वच्छ भारत के तहत डस्टबिन वितरण का कार्य कर्मचारियो की कमी का बहाना के नाम से पूर्ण नही पा रहा है। वही सबसे बड़ी समस्या नगर पालिका सीएमओ खेलकुमार पटेल का सारंगढ़ में स्थायी रूप से नही रहना है। सप्ताह में दो दिन ही सीएमओ सारंगढ़ मुख्यालय में रहते है जबकि उपयंत्री तारकेश्वर नायक बरमकेला से ही आना जाना कर रहे है। जिसके कारण से शहर का निरीक्षण का कार्य अधिकारी कर ही नही रहे है जिससे कागजो पर सारंगढ़ स्वच्छ और साफ हो गया है।
    बजबजाती नाली और पिलिया-उल्दी दस्त का दोहरा मार?
सारंगढ़ नगर मे दूषित पानी के कारण से पिलिया का प्रकोप और उल्टी दस्त के प्रकोप से 300 से अधिक शहरवासी बड़ी मुश्किल से अपनी जान बचा पाये। 100 से अधिक मरीजो को रायगढ़ रिफर किया गया जिनके ईलाज में परिजनो को लाखो रूपये का खर्च आया। किन्तु पालिका बजबजाती नाली और दूषित पानी को ठीक करने के लिये नगर पालिका के पास कोई उपाय नही है। गर्मी सर पर है और सफाई कर्मचारी के होते हुए बजबजाती नालियो को साफ करने के लिये नगर पालिका के पास कोई ठोस उपाय नही है। नालियो और दूषित पानी आपूर्ति के कारण से स्वच्छ सारंगढ़ के नाम पर दूषित सारंगढ़ का नाम से प्रसिद्ध हो रहा है।

प्लेसमेट के सफाई कर्मचारी बने साहबो के घरेलू सहायक?
सारंगढ़ नगर पालिका में दर्जन भर से अधिक सफाई कर्मचारी मानदेय तो सफाई कर्मचारी के नाम से मानदेय प्राप्त करते है किन्तु सेवा अधिकारियो और नेताओ के यहा की करते है। सूत्रो की माने तो अधिकारियो के द्वारा अपने घरो में घरेलू कार्य करने के लिये तथा नेताओ प्रतिनिधियो के द्वारा घरेलू कार्य करने के लिये सफाई कर्मचारियो को अपने घरो पर रखा गया है। ऐसे प्लेंसमेंट कर्मचारियो की संख्या दर्जन भर से अधिक है जो कि सफाई व्यवस्था के नाम पर रखे गये है किन्तु कार्य घरेलू काम कर रहे है। जिससे सीधा सीधा स्वच्छता का फंड का साफ साफ दुरूपयोग है।

नये जुड़ें 23 गांव में साफ सफाई शून्य?
नगर पंचायत सारंगढ़ का सीमा विस्तार कर 23 गांवो को जोडक़र नगर पालिका बनाया गया है। किन्तु नये जुड़े 23 गांवो में साफ सफाई का काम शून्य है। पुराने नगर पंचायत क्षेत्र को ही नगर पालिका सम्हाल नही पा रही है वही नये जुड़े क्षेत्रो के लिये कोई भी बुनियादी सुविधा नही है। नये जुड़े गांव और पुराने शहर मे साफ सफाई का काम ठप्प होने का एक मात्र कारण रूचि का आभाव है। नगर पालिका अध्यक्ष अमित अग्रवाल का ध्यान बिल्कुल भी इस ओर नही है। वही पार्षदो को सफाई कराने के लिये सफाई कर्मी भेजने के लिये एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ता है। इन गांवा के हिसाब से सेटअप की भी मांग नगर पालिका परिषद नही कर रही है जिसके कारण से मूलभूत सुविधा को बरकरार रखने के लिये नगर पालिका के माथे पर पसीना आ रहा है तथा अपने कर्तव्य को छोडक़र अधिकारी और जनप्रतिनिधि भाग रहे है।
               

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *