Thursday, January 18, 2018
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पहलें धर्म फिर समाजसेवा के नाम पर कैसे ठगे गए नेत्रहीन, पढिये…………..

रायगढ मुनादी ।।

 

आजकल यदि कोई खुद को समाजसेवी कहता है तो सबसे पहले अपना फ़ोटो अनाथ बच्चों के साथ, कुछ वीडियो गरीब महिलाओं के साथ और फेसबुक स्टेटस विकलांग बच्चों का साथ दिखाता है। बिना फ़ोटो के आजकल समाज सेवा भी नहीं हो पा रही। यह समजसेवा के नाम पर मेवा खाने का काम ज्यादा है।

घरघोड़ा के अमलीडीह गांव में नेत्रहीन बच्चों का स्कूल चलनेवाले वरुण प्रधान का यही कहना है। उनकी कहानी किसी आर्ट थीम की फिल्मों जैसी है। अपना सबकुछ गवांकर नेत्रहीन बच्चों के लिए स्कूल खोला, कर्ज में डूब गए, बच्चों के सेवा कर रहे हैं पर ऐसे लोग भी हैं जो उनके इस काम को सराहने के बजाय सहानुभूति दिखाकर उनके नाम लोगों से चंदा लेकर पैसा हजम कर जा रहे हैं । वरुण खुद 50 के हो चुके हैं और अपने विद्यालय में करीब 40 नेत्रहीन बच्चों को रखते हैं। कभी जमीन के नाम पर लोन लेकर तो कभी कर्ज लेकर स्कूल चलाते हैं। उनका कहना है कि लोग उनके नाम का उपयोग करके उनके सामने लोगों से चंदा लिया और उन्हें फूटी कौड़ी तक न दी। इसमें एक कथावाचक का भी नाम है जो तमनार के कसडोल में रहते हैं।

स्टेज पर बुलाना, फोटो खिंचवाना

इनके नाम का उपयोग करने केलिए लोग अपने सर्च इनका फ़ोटो खिंचवाकर, कोई आयोजन में स्टेज पर बिठाकर, लोगों को यह जताकर की हम इनके मसीहा हैं प्रदर्शित करते हैं लेकिन इस संस्था को संचालित करनेवाला वरुण और यहां के बच्चे बदहाल। समाजसेवा के नाम पर इन बच्चों को शो पीस बना दिया।

भाजपा नेत्री पर भी आरोप

अभी कुछ दिन पहले समाजसेवा और भाजपा में प्रवेश को लेकर चर्चित हुए घरघोड़ा नगरपंचायत उपाध्यक्ष कविता शर्मा के ऊपर भी घरघोड़ा के एक व्यक्ति ने नेत्रहीन विद्यालय के नाम पर वसूली कर गोलमाल का आरोप लगा है जिसकी जांच अब पुलिस कर रही है। पुलिस ने शिकायतकर्ता उस्मान बेग का बयान भी लिया है। यह हालांकि अभी आरोप ही है पर इससे पहले श्रीमती शर्मा का उन बच्चों के साथ कहानियां अखबारों में खूब छपी हैं। वरुण कहते हैं कि जब उन्होंने बच्चों के साथ उनको फ़ोटो खिंचने से मन किया तो तो उन्होंने भविष्य में कोई भी सहयोग करने से इंकार कर दिया।

कोई तो भंवर से निकालो

विद्यालय के संचालक का कहना है कि रोज समाजसेवा और दान की कहानियां वे अखबारों में पढ़ते हैं लेकिन अभी तक उनके पास कोई ऐसा आदमी नहीं आया जो निस्वार्थ बच्चों को कुछ कर सके। कर्ज में डूब चुके वरुण को अभी भी अपनी नही बच्चों की ज्यादा फिक्र है।

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