Thursday, September 20, 2018
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रमन ,दमन, अमन और हड़ताल हो गई वापस, शिक्षाकर्मी आंदोलन वापसी की ये है असली इनसाइड स्टोरी

 

 

छत्तीसगढ़ मुनादी ।।

 

शिक्षाकर्मियों के वृहद आंदोलन की परिणति आखिर शून्य पर पैवेलियन लौटने के रूप में क्यों हुई। जब बातचीत का दौर जारी था तो शिक्षा कर्मियों को कुछ हासिल क्यों नहीं हुआ? क्या था प्रशासन और शिक्षाकर्मी नेताओं के बातचीत का टर्निंग पॉइंट जहां से शिक्षाकर्मी नेताओं को अपना हड़ताल शून्य पर वापस ले लेना पड़ा। बाद ही दिलचस्प मसला है, जो अब छनकर बाहर आ रही है।

रमन और उनके सलाहकार अमन दोनों ने मिलकर शिक्षाकर्मियों को घुटने टेकने पर मजबूर करने की रणनीति बनाई। बिल्कुल ! पूरा मसला, सीएम हाउस से ही डील हो रहा था। इस काम में अमन सिंह, जो मुख्यमंत्री के बाद दूसरे नंबर पर हैं , उनको लगाया गया था। जब रायपुर कलेक्टर ओ पी चौधरी आंदोलनकारी नेताओं से बात कर रहे थे तो बीच बीच में अमन सिंह उनसे अपडेट भी ले रहे थे। नेताओं को स्पष्ट कहा जा रहा था कि 5 दिसंबर से पहले हड़ताल वापस लो, इससे कम कुछ नहीं। जेल में बंद आंदोलनकारी नेताओं को मनोवैज्ञानिक तरीके के प्यार से धमकाया जा रहा था। उन्हें कहा जा रहा था कि हड़ताल वापस नहीं लोगे तो जमानत भी नहीं होने दिया जाएगा। हालांकि गिरफ्तार नेताओं पर सिर्फ आईपीसी की धारा 151 लगाया गया था जिसपर एसडीएम ही जमानत दे सकते थे लेकिन उन्होंने आंदोलनकारियों को कह दिया था कि भैया दबाब है में कुछ नहीं कर सकती।

महिलाओं के द्वारा दवाब की रणनीति

इससे पहले के आंदोलनों में कभी भी महिलाओं की गिरफ्तारी नहीं हुई थी लेकिन इसबार महिलाओं को न केवल गिरफ्तार कर लिया गया बल्कि उन्हें रायपुर और सेंट्रल जेल भी लाया गया, जहां का माहौल देखकर उनके होश फाख्ता हो गए। के शिक्षाकर्मी महिलाएं घर में बच्चों को छोड़कर आ गयी थी, जब उन्हें जेल हुआ तो उनका पूरा परिवार आ गया। कुछ महिला शिक्षाकर्मी जेल में रोने लगी इससे नेतृत्व पर दवाब बढ़ने लगा जैसा सरकार चाहती थी।

सीएम हाउस डील कर रहा था मसला

कहा जाता है कि बीच में अजय चंद्राकर ने मध्यस्थता करने की कोशिश की भी तो उनके पास सीएम हाउस से फ़ोन आ गया। चंद्राकर इनकी कुछ मांगों को मान लेना चाहते थे। यहां तक कि आरएसएस और कई विधायक भी इनके के मांगों के साथ थे लेकिन सीएम और उनके सिपहसालार अड़ गए। शिक्षाकर्मियो को स्पष्ट कहा गया कि मामला सीएम हाउस ही डील कर रहा है किसी के बहकाबे में न आएं।

अमन सिंह सख्त थे

अमन सिंह के बारे में यह कहा जाता है कि एक बार मुख्यमंत्री की बात खारिज हो सकती है पर इनकी नहीं। इस मसले पर उनका दो टूक रवैया यह था कि आंदोलन वापस करो। शून्य पर आंदोलन वापसी की जिद्द इनकी ही थी ऐसा कहा जा रहा है। अमन सिंह ही वो आदमी थे जिन्होंने हड़ताल वापसी की प्रेस कांफ्रेंस के लिए फैसला से पहले मीडिया को बुलवा लिया था।

दमन के आगे झुकना पड़ा

आंदोलनकारी नेताओं ने बुझे स्वर में मुनादी से अनौपचारिक बातचीत करए हुए कहा कि भैया कनपटी पर बंदूक रखकर हड़ताल वापसी कराई गई है। हमें कह दिया गया था वापस नहीं होंगे तो झेलना पडेगा। हैम आखिर सरकारी कर्मचारी हैं कितना टिक पाते।

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