Wednesday, June 26, 2019
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राजपूतो के शौर्यगाथा को स्कूली पाठ्यक्रम से हटाने मोदी को. लिखा पत्र

Dhananjay Singh Thakur

रायपुर मुनादी ।

 

 

राजधानी रायपुर के धनंजय सिंह ठाकुर ने राजपूतो क्षत्रियों के प्रेरणादायी शौर्य गाथा को स्कूल के कोर्स से बाहर करने प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है।
 धनंजय ने पत्र में लिखा है कि भारत सरकार एवं राज्य सरकार के शिक्षा विभाग के द्वारा राजपूत क्षत्रियों के मातृभूमि जन्मभूमि के प्रति त्याग, तपस्या ,बलिदान ,सेवा को स्कूलों में कोर्स के माध्यम से पढ़ा कर नौनिहालों में मातृभूमि के प्रति जन्म भूमि के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने का जज्बा पैदा किया जाता है क्योंकि पूरा इतिहास राजपूत क्षत्रिय क्षत्राणियो का माटी के प्रति समर्पण एवं बलिदान से भरा हुआ है। लेकिन पिछले कुछ सालों से अभिव्यक्ति की आजादी को आधार बनाकर फिल्म निर्माताओं के द्वारा इतिहास में दर्ज क्षत्रियों के शौर्य गाथा को  छेड़छाड़ कर कपोलकल्पित  कहानी गढ़कर ऊलजलूल ढंग से फिल्मों के जरिए प्रदर्शित किया जा रहा है और मातृभूमि में शीश कटाकर चढ़ाने वालो का अपमान किया जा रहा है।  और जब पूर्वजों के मान सम्मान को बचाने के लिए राजपूत समाज के द्वारा उस पर आपत्ति दर्ज कराया जाता है तो कानूनी प्रक्रियाओं में उलझाकर उसे अभिव्यक्ति की आजादी की स्वतंत्रता बताकर फिल्म के प्रदर्शन को भारत सरकार और राज्य सरकार के द्वारा सुरक्षा प्रदान कर जबरदस्ती प्रदर्शित करवाया जाता है जो कि राजपूत समाज के साथ-साथ उन शहीद वीर वीरांगनाओं का अपमान है।अभी हाल ही में फिल्म पद्मावती जिस महारानी पद्मावती के ऊपर फिल्मांकन किया गया है उसने राज्य में आई खिलजी नामक विपत्ति से पूरे राज्य को बचाने जौहर कर ली थी उसके चरित्र को गलत तरीके से पेश कर एक सत्ती नारी का अपमान किया गया है। जिसका भारत भर में विरोध हो रहा है।लेकिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है चाहे किसी का चरित्र हनन ही क्यों ना किया जाये।

महोदय,पूर्व में भी कई सारी फिल्में राजपूतो के ऊपर फिल्माया गया है जिसमें राजपूतों छवि को एक क्रूर शासक दमनकारी शोषणकारी निम्न वर्गों के विकास में बाधक के रूप में प्रदर्शित किया गया जिसके कारण पूरे समाज की छवि धूमिल हुई एवं जन मानस में राजपूतों के प्रति घृणा की भाव उत्पन्न हुआ है जबकि सत्यता यह है इतिहास के पन्ने को पलटा जाए तो जब जब प्रजा हित की बारी आई है तो राजपूतों ने अपने शीश तक कटाएं हैं महोदय इस पत्र के माध्यम से बड़े ही दु:खी मन से आप से आग्रह करना चाहता हूं की जब अभिव्यक्ति की आजादी की स्वंत्रता को प्राथमिकता से महत्व देकर राजपूतों की शौर्य गाथा को दरकिनार किया जाता है ऐसे में स्कूलों में शिक्षा के माध्यम से जो प्रेरणा जो भावना माटी मातृभूमि के प्रति उत्पन्न करने राजपूतों की शौर्य गाथाओं का गुणगान किया जाता है। उसकी आवश्यकता ही नहीं बचती है क्योंकि बच्चों को जो इतिहास में जो पढ़ाया जाता है उसके उलट आज फिल्मों एवं सोशल मीडिया के माध्यम से राजपूतों के प्रति नफरत फैलाने वाले विषय ज्यादा कारगर रुप से मिल रहे हैं। आपसे विनम्र प्रार्थना है अभिव्यक्ति की आजादी की स्वतंत्रता को आप बचाए रखने के लिए कृपया कर राजपूतों की शहादत का अपमान करने की छूट किसी को भी ना प्रदान करें या राजपूतों की शौर्य गाथा को जो प्रेरणादाई है स्कूलों की विषय से हटाने का निर्देश तत्काल दें ताकि हम अपने पुरखों के हो रहे हैं मान सम्मान को चोट पहुंचाने वाले विषयों की पीड़ा को मौन होकर बर्दाश्त कर पाए और इस सरकार से किसी भी प्रकार की उम्मीद अपने पूर्वजों के शौर्य के प्रति मान सम्मान में ना कर सके।

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