Sunday, July 15, 2018
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आखिर वन विभाग में चल क्या रहा है आए दिन सुर्खियों में क्यों …… लगातार उठ रहे सवाल पर कार्य प्रणाली में लग रहा सवालिया निशा

रायगढ़ मुनादी

 

 

 

 

आखिर रायगढ़ वन मंडल इतना सुर्ख़ियो में क्यों है आये दिन मिडिया में किसी न किसी मुद्दे को लेकर अखबारों सोसल मिडिया में अक्सर भरस्टाचार, लापरवाही, अनदेखी की वजह से लगातार वन व् वन्य जीव को नुकसान हो रहा है वहीँ दूसरी ऒर योजनाओं की राशि को वनों के विकास ने नाम पानी की तरह बहा दिया जा रहा जिसका फायदा वनों का विकास कम विनाश ज्यादा की खबरे आ रही है।

रायगढ़ वन मंडल पर आरोप हैंकि लगातार वनों की कटाई हुई इससे वनों का जम कर दोहन हुवा वनों में कटाई का आरोप मिली भगत कर अंजाम दिया गया। कटाई का मामला जब जब उठा साथ में अधिकारियो कर्मचारियो का भी मुख्यालय में नहीं रहने का भी मामला सुर्ख़ियो में रहा जिससे कोई इंकार भी नहीं कर सकता।

दर असल किसी भी मामले विकास का पैमाना, चाहे वह वनों से ही जुड़ा हुवा क्यों न हो उस व्यवस्था की रीढ़ की हड्डी निचले स्तर के अधिकारी और कर्मचारी होते है। रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले अधिकारी और कर्मचारी दोनों पर ही गंभीर आरोप है दोनों ही स्तर के अधिकारी कर्मचारी मुख्यालय में नहीं रहते है ये सभी जानते है लेकिन इन पर ऊपर के अधिकारियो का कभी कोई न तो नोटिस दिया गया न कभी कोई जवाब मांगा गया। यहाँ तक की कई बार तो ऐसे गंभीर मामले भी सामने आये लेकिन कभी कोई किसी पर भी, कोई कार्रवाई नहीं की गई। कार्रवाई तो दूर एक अदद नोटिस जारी कर जवाब तलब की भी जहमत नहीं उठाई गई। मिडिया में आई खबरों को कभी कोई तवज्जो ही नहीं दी गई। धीरे धीरे तो अब ये आलम हो चला है कि ऐसा बहोत होते रहता है की तर्ज़ पर पूरे रायगढ़ वन मंडल का सत्यानाश कर दिया गया है जो बचा खुचा है उसे भी सत्यानाश एक साजिश के तर्ज पर होने दिया जा रहा है।

ख़ास बात यह है कि कई मुद्दों पर अधिकारियो से बात की जाती अधिकाँश मामलो पर किसी जिम्मेदार अधिकारी का पक्ष जरूर लिया जाता जिनका कई बार जवाब भी बेहद हास्यास्पद होता है। दिख्वायएंगे करावेंगे करते करते सालो बित जा रहा है लेकिन आज तक न तो कर्मचारियो पर नकेल कसा गया न तो वनों के विकास को लेकर कोई ठोस कदम उठाया गया। अब तो ऐसा हो गया की अधिकारी और कर्मचारी से बात करना भी बेमानी सा लगने लगा है।

इन दिनों दावानल की वजह से भारी मात्रा मेँ कूपो के क्षति होने का मामला सुर्ख़ियो में बना हुवा है। खबरों की माने तो रायगढ़ वन परिक्षेत्र के बंगुरसिया सर्किल में आग लगने की ऐसी घटना घटित हुई, जिसमें शासन को करोड़ो रुपए का नुकसान हो गया और यहां सैकड़ों की संख्या में कराए गए कूप कटिंग का कूप जल कर राख हो गया जो जानकारी छन कर आ रही है मामले में तत्काल कार्रवाई करने के बजाए अब इसकी भरपाई करने के लिए अन्य पेड़ों की कटाई कराने में लगे हुए हैं। बताया जा रहा है कि जले हुए कूप के साक्ष्य को मिटाने का षड्यंत्र है ये यही वजह है कि कूप के जल कर राख हो जाने की घटना की खबर मिलते ही आनन् फानन में कुछ दूसरी घटना को अंजाम दिया जा रहा है।

गर्मी का मौसम आते ही जंगलों में दावानाल की घटनाएं शुरू हो चुकी थी, लेकिन इसके बाद भी विभाग के अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया और लापरवाह बरतने वाले कर्मचारियों को मार्च माह वित्तीय वर्ष होने के कारण सरंक्षण देने में लगे रहे। नतीजा यह हुआ कि , लेकिन इसके बाद भी विभाग के अधिकारी अपनी मनमानी करने से बाज नहीं आए और मामले में तत्काल कार्रवाई करने के बजाए अब इसकी भरपाई करने के लिए अन्य पेड़ों की कटाई कराने में लगे हुए हैं

 

मिल रही जानकारी के अनुसार इस मामले में जाँच की बात तो दूर इस मामले अधिकारी अपने मातहतों के साथ उस जल हुए साक्ष्य को ही मिटाने में जुटे हुए है।

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