Wednesday, January 17, 2018
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पद्मावती के बारे में इस संत ने ऐसा क्या कहा जिससे शुरू हो गई बहस

रायगढ मुनादी ।।

 

पद्मावती भारत के इतिहास में एक ऐसी नारी है जिसने अस्मिता की रक्षा करने के लिए भारतीय नारियों को मरना सिखा दिया। इन्हीं से प्रेरणा लेकर कई अन्य महिलाओं ने भी अपनी अस्मिता की रक्षा करने के लिए अपनी जान दी । 1946 में जब कश्मीर में कबीलाई आतंक चरम पर पहुंचा तब जम्मू के एक कुएं में हजारों महिलाओं ने कूद कर अपनी जान दे दी और अपनी अस्मिता की रक्षा की । इस तरह भारतीय इतिहास में पद्मावती नारी अस्मिता का प्रतीक है । जो लोग उसके चरित्र के साथ छेड़छाड़ कर रहे हैं वह हमारे इतिहास को पंगु बना रहे हैं । यह बात अतुल भारद्वाज जी ने प्रेस के साथ चर्चा के दौरान कही । अतुल भारद्वाज रायगढ़ में रामदास परिवार द्वारा आयोजित रामकथा करने आए हैं।

संत की इस बयान के बाद लोगों में यह चर्चा शुरू हो गई कि महिलाओं को अपनी अस्मिता की रक्षा करने के लिए झांसी की रानी की तरह लड़ना चाहिए या रानी पद्मावती की तरह जोहर करके मर जाना चाहिए। एक सप्ताह से चल रहे इस रामकथा में अब तक हजारों श्रद्धालु हिस्सा ले चुके हैं । प्रेस वार्ता के दौरान देश, राजनीति और देशप्रेम पर पूछे गए कई सवालों का भी उन्होंने जवाब दिया । जब उनसे पूछा गया कि देशभक्ति और राष्ट्रवाद कुछ लोगों की बपौती बनती जा रही है इस पर उन्होंने कहा की जो लोग देशभक्त नहीं हैं वह देश द्रोही हैं । वे लोग देशभक्त नहीं हो सकते जो लोग कश्मीर, हिंदू, गाय आदि के विरुद्ध हैं वे देश भक्त नहीं हो सकते। शिक्षा संबंधी  सवालों पर अतुल भारद्वाज ने कहा कि जिन लोगों पर रामराज लाने की जिम्मेदारी थी उन्हें सबसे पहले शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करना था लेकिन वे जीएसटी और नोटबंदी में फंस गए ।  इस सवाल पर कि धर्म एक प्रोडक्ट बन गया है जिसका दुकान लगाकर लोग अपने अपने उत्पादों को बेच रहे हैं उन्होंने कहा कि जो ऐसा कर रहे हैं उन्होंने, लोगों का सम्मान खोया है लेकिन बाबा रामदेव का बचाव करते हुए कहा कि वे देश हित के लिए व आयुर्वेद, योगा के प्रचार के लिए अपने धन को खर्च करते हैं । उन्होंने कहा कि  बाबा रामदेव ने पतंजलि विद्यालय  भी खोला है जहा से  देशभक्त और संस्कारी बच्चे निकलेंगे।

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