Wednesday, November 21, 2018
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बेटी बचाओ का सच, नियमों का पालन ही नहीं और आंकड़ों की कर रहे बाजीगरी

रायगढ मुनादी।।

 

प्रदेश का एक मात्र बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जिले में नारे तो खूब लगवाए जा रहे हैं पर सोनोग्राफी सेन्टर नियमों का पालन नहीं कर रहे। स्वास्थ विभाग भी फ़र्ज़ी आंकड़ों पर अपनी पीठ ख़ुद थपथपाकर शांत है। वैसे तो पूरे प्रदेश में ही यह हाल है पर जिले में PCPNDT एक्ट का पूरी तरह पालन नहीं हो रहा। स्वास्थ विभाग की नाकामी का आलम यह है कि वह न तो सलाहकार समिति की बैठक ठीक से करवा पा रही है और न ही समिति के सदस्यों को कोई जानकारी ही दे रही है।

कन्या भ्रूण हत्या को रोकने सरकार ने PCPNDT एक्ट बनाया जिसमे गर्भ में कन्या भ्रूण की हत्या को रोकने कई प्रावधान है। चूंकि जिले में 0 से 6 साल के बच्चियों की संख्या काफी कम है इसलिए इस कानून का यहां कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए था लेकिन यहां तो नियमों की औपचारिकता भी पूरी नहीं हो पा रही है। PCPNDT एक्ट को लागू कराने एक एप्रोप्रियेट अथॉरिटी होती है जो नियमों के पालन करवाने निगरानी करती है। लेकिन जिले में कमिटी के सदस्यों की न तो बैठक होती है और न ही उन्हें कोई जानकारी दी जाती है।

यहां के सोनोग्राफी सेंटर्स की न तो कोई नवीनीकरण होती है और न ही लाइसेंस की प्रकिया का परिपालन किया जाता है। एप्रोप्रियेट अथॉरिटी के सदस्य युवराज सिंह का कहना है कि जिले में कितनी सोनोग्राफी मशीन हैं, कितने को बदला गया है, कितने का नवीनीकरण नहीं हुआ इसकी जानकारी न तो उन्हें है और न ही कभी बताया गया। इस कमिटी की बैठक भी नहीं होती है।  ऐसे में सवाल उठता है कि अधिकारी अपनी मनमानी कर रहे हैं और हवा हवाई आंकड़ों से सरकार और लोगों को गुमराह तो नहीं कर रहे हैं।

नियमों का यह हाल है कि कई अस्पताल और सोनोग्राफी सेन्टर बिना किसी लाइसेंस संचालित है, किसी का लाइसेंस नवीनीकरण नहीं हुआ तो किसी की एप्लीकेशन नगर निगम और स्वास्थ्य महकमे में धूल खा रही है पर स्वास्थ विभाग को उसकी परवाह नहीं है। ऐसे में बेटियां बच रही है या नहीं उसकी कोई जानकारी सही तौर पर नहीं मिल पा रही है।
जिले इन 2011 के आंकड़ों के अनुसार 0 से 6 साल के बच्चियों के लिंगानुपात 1000 में 945 था जो 2014 में 918 हो गया अब कहा जा रहा है कि यह अनुपात बढ़कर 936 तक पहुंच गया है लेकिन इसकी जानकारी के स्रोत और संख्या की सत्यता पर सवाल उठ रहे है हैं।

जिले के सोनोग्राफी सेंटर्स में एक्टिव ट्रैकर सिस्टम जरूर लगाया गया है लेकिन पुराने और नए आंकड़ों को लेकर स्वस्थ विभाग ने सोनोग्राफी सेंटर्स से न तो कभी कोई पूछताछ की और न ही करवाई की। स्वास्थ्य महकमे से अब लोगों की कोई उम्मीद भी नही है।

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