Saturday, September 22, 2018
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महज 4 साल पहले सियासत की जमीन पर पाँव रखने वाली प्रियम्बदा जूदेव सियासत का आसमान छूना चाहती है …जानिए ,कैसे ?

जशपुर राजघराने की बड़ी बहू प्रियम्बदा सिंह जूदेव यूँ तो पिछले 4 सालों से राजनीति में सक्रिय हैं लेकिन पिछले 1 -2 वर्षो से इन्होंने जिस अंदाज में सियासत की शुरुआत की है उसको लेकर अभी से ही इनके सियासी भविष्य के कयास लगाये जाने लगे हैं ।माना यह जा रहा है कि विपरीत परिस्थितियों में सियासत के पायदान पर महज 4 साल पहले कदम रखने वाली प्रियम्बदा सियासत का आसमान छूने की तैयारी कर रही है “।
हम आपको बता दें कि इनके पति शत्रुंजय प्रताप जूदेव और ससुर स्व दिलीप सिंह जूदेव के देहावसान के बाद जब जशपुर की सियासत में बिरानी छा गयी थी और दो बड़े चुनाव सिर पर थे उस वक़्त बहुत बड़ी उम्मीद के तौर पर इनका राजनितिक अभ्युदय हुआ था । तब यह माना जा रहा था कि स्व दिलीप सिंह जूदेव के संसदीय क्ष्रेत्र बिलासपुर से पार्टी इन्हें स्व जूदेव के बतौर राजनैतिक उत्तराधिकरी के रूप में टिकट देने की सोच रही है लेकिन सियासत में समीकरण बदलते देर नही लगते और यही हुआ समीकरण कुछ ऐसा बदला कि पार्टी ने यहां से किसी और को टिकट दे दी और जश्पुर रियासत के राजा रणविजय सिंह को राज्यसभा भेज दिया गया ।लेकिन पार्टी के इस फैसले को एक सधे हुए सियासतदां की तरह कबूल करते हुए सियासत की न तो राह छोड़ी न ही हौसला कम किया बल्कि जश्पुर जिले के तमाम बुनियादी मुद्दों को साथ लेकर आम जनता के बीच खड़ी हो गयी और एक एक समस्याओं से जूझना शुरू कर दिया। महलो में पलने वाली राजघराने की बहू सड़क पर आकर आम जशपुरिया की प्रखर आवाज के रूप में स्थापित होने लगी । चाहे पहाड़ी कोरवाओं की समस्या को लेकर पदयात्रा करने का मामला हो या बगीचा के जल सत्याग्रह आंदोलन का या कुनकुरी का सोशल मीडिया विवाद का इन सभी मामलो में इनका सशक्त दखल देखा गया और सकारात्मक परिणाम भी दिखे ।इसके अलावा बेटी बचाओ अभियान और शहर के लोगो को बुनियादी समस्याओं से निजात दिलाने के लिए ‘काजनीति”का जो नया फार्मूला अख्तियार किया इसको लेकर जानकारों के बीच इस बात की चर्चा शुरू हो गयी है कि पार्टी ने इन्हें चुनावी तैयारी के कहीं न कही संकेत तो दिए हैं ।
सियासी बातें और आंकड़ें जो बयां करते हो लेकिन प्रियम्बदा अभी से कुछ बयाँ नही करना चाहती । पूछने पर कहती है -“टिकट लेना -देना और चुनाव लड़ना या न लड़ना यह कोई कार्यकर्ता तय नही करता ,यह जनता और पार्टी के शीर्ष नेता तय करते हैं ।कार्यकर्ता का काम पार्टी के सिद्धान्तों को आगे रखकर जनमानस की सेवा करना होता है और यह सेवा हम आखिरी दम तक करेंगे । मेरे राजनीति में आने का मकसद चुनाव लड़ना या चुनाव जीतना नही बल्कि जशपुर की जनता के लिए लड़ना और उनको न्याय दिलाना है । और जहाँ तक सवाल पॉवर का है तो मेरे पास यह सबसे बड़ा ”पॉवर”है कि मैं कुमार दिलीप सिंह जूदेव की बहू हु । इससे बड़ा न तो हमारे लिए कोई पोस्ट हो सकता है न पावर । उनके सपने और उनके अधूरे कार्यो को पूरा करना राजनितिक जीवन नही बल्कि मेरे मूल जीवन का भी वही उद्देश्य है ” ।

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