Tuesday, March 26, 2019
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Munaadi Breaking -यहां गरीबों का प्रवेश नहीं होगा, और लगा दी एंट्री फीस, जब मचा बवाल , फिर ……….

 

रायगढ़ मुनादी।

 

 

जेसीआई एक ज़िम्मेदार समाजसेवी संस्था है। रायगढ़ में जेसीआई ने अब तक समाज सेवा के नाम पर अपने आप को स्थापित करते चले आ रहे हैं। हद तो तब हो गई जब 20 रुपए गेट पास के नाम लिए जाने की बात पर कहा गया कि एकदम से गरीब तरह के लोग अंदर प्रवेश न करें इसके लिए शुल्क रखा गया है । मामला जब मीडिया में बढ़ता चला गया तब आनन-फानन में यहां पोस्टर लगाया गया कि मुक्तिधाम के सौंदर्यीकरण के लिए उपयोग होगा।
जेसीआई फेस्टिवल के नाम पर यहां लोगों से खुली लूट की जा रही है चलिए यहां पर आप स्टाल लगाते हैं तो फेस्टिवल के खर्च के नाम पर उनसे स्टाल शुल्क के रूप में ले सकते है लेकिन यह भी उचित नही है।

अब तक आप शहर वासियों व गरीब वर्ग के लिए काइट फेस्टिवल आयोजित करना बताते रहे है लेकिन यहां स्टाल लगाने की भी शर्त है कमीशन तय किया गया है। स्पॉन्सर के नाम पर अलग वसूला गया है बिक्री पर कमीशन अलग फिक्स कर लिया गया है।

मुनादी. कॉम के काइट फेस्टिवल के नाम पर लूट की एक्सक्यूव बात चीत की रिकॉर्डिंग है जिससे इनकी पोल खुलती है।


कुल मिलाकर शहर का यह काईट फेस्टिवल जेसीआई के कमाई व धनाढ्य वर्ग के लोगों के लिए बनकर रह गया है। जेसीआई के द्वारा मुक्तिधाम सौंदर्यीकरण के नाम पर हर साल रसीद काटी जाती है और इस साल भी मुक्तिधाम सुंदरीकरण के नाम पर रसीद काटी गई।

पतंगबाज़ी की गुम होती परंपरा को सहेजने के उद्देश्य से हर साल जेसीआई ने नटवर स्कूल के मैदान में काईट फ़ेस्टिवल की परंपरा रायगढ़ में शुरू की। इस आयोजन का स्वरूप वैसे तो पूरी तरह मनोरंजक होता है और साल में एक बार ख़ास वर्ग के गेट-टुगेदर का माध्यम भी बन जाता है। लेकिन इस आयोजन में ख़ासकर निम्न, निम्न मध्यवर्ग के परिवार बच्चों सहित पहुंचकर थोड़ा मज़ा लेते रहे हैं लेकिन यह सब अतीत के पन्नो पर।

साल में एक बार जेसीआई अपने इस बड़े आयोजन काईट फ़ेस्टिवल के बहाने प्रेस से भी अपनी नज़दीक़ियां और संबंध रिफ़्रेश कर लेता है। प्रेस के सदस्यों के लिये आयोजन के फ़्री कूपन भी जेसीआई मुहैया करा देता है, कार्यक्रम में जाओ तो मान सम्मान भी भरपूर मिलता है। अब तक जेसीआई का काईट फ़ेस्टिवल एण्ट्री के मामले में निःशुल्क रहा है। अंदर जाने पर तमाम खान पान, गेम्स और पतंगबाज़ी की सुविधाएं कूपन ख़रीदने पर मिलती रही हैं।

आयोजन स्थल में भीतर तमाम व्यावसायिक संस्थानों के स्टाॅल लगते हैं जो अपने व्यवसाय को प्रमोट भी करते हैं, जिसके लिये आयोजक संस्था इनसे पैसा भी लेती है वहीं इस आयोजन में जेसीआई के कई प्रायोजक व्यक्तिगत या संस्थागत तौर पर आर्थिक सहयोग भी करते हैं।इस साल के आयोजन में जेसीआई ने आयोजन में बीस रूपये की एण्ट्री फ़ीस लगाकर कहीं न कहीं इस आयोजन को समाज के उस वर्ग से दूर कर दिया है जिसकी सेवा की बात जेसीआई जैसी तमाम पूंजीवादी संस्थाएं करती हैं। जब आप कार्यक्रम स्थल पर सुविधाओं के लिये कूपन काटकर शुल्क लेते हैं तो फिर एण्ट्री फ़ीस लगाने का भला क्या औचित्य?
और जब सरकारी मैदान में ऐसे आयोजन एण्ट्री फ़ीस लेकर किये जाने लगें तो उसे मीना बाज़ार की तरह पूर्ण व्यावसायिक आयोजन की श्रेणी में रखा जाना चाहिये। जब बीस बीस रूपये एण्ट्री फ़ीस वसूली की जाने लगी हो तो फिर स्कूल मैदान के किराये, बिजली की खपत के साथ साथ पार्किंग की पर्याप्त इंतज़ामात की भी लाईबिलिटी आयोजक संस्था पर फ़िक्स होनी चाहिये।
वैसे अगर जेसीआई ने इस आयोजन को एण्ट्री फ़ीस के दायरे से बाहर रखा होता तो शायद ऐसी बातें ना उठतीं क्योंकि इससे पहले ऐसी बातें किसी भी आयोजन के साथ नहीं उठी हैं।

और खास बात यह है कि इस बार टिकट लेकर जैसे ही आप गेट एंट्री के पास पहुंचते हैं वहां पर कुछ बाउंसर तैनात होते हैं ऐसे देखकर मानो ऐसा लगता है कि हम कहां आ गए आखिर जेसीआई संस्था ऐसा कर शहरवासियों को समाज सेवा के नाम पर क्या संदेश देना चाहती है एक बड़ा सवाल और यक्ष प्रश्न यही है।

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