Sunday, December 16, 2018
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पुलिस नाकेबंदी में व्यस्त थी और आतंकी शहर में घूम रहा था, रायगढ़ पुलिस माशाल्लाह

रायगढ़ मुनादी ।।

 

चलती ट्रेन से कूदकर भागने वाला आतंकी अब्दुल नहीं रायगढ़ पुलिस के तमाम नाकेबंदी हो और सुस्ती को धता बताते हुए 4 घंटे तक शहर में ही टहलता रहा और पुलिस उसे पहचान भी न सकी। यही नहीं पुलिस इस खबर को छिपाने में जितनी ताक़त झोंकी उतने का कुछ प्रतिशत भी यदि कड़ी नाके बंदी में लगाई होती तो इस आतंकी को पकड़ने में खर्च हुए करीब 2 करोड़ रुपये सरकार के बच जाते।

जब रायगढ़ जीआरपी ने तफ़शील से अब्दुल नईम से पूछताछ की तब यह बात पता चली। नईम के अनुसार वह जामगांव के रेलवे साइडिंग के पास जहां गाड़ी स्लो हुई वहां वह उतर गया था। यही नहीं वह जामगांव से रायगढ़आया और 4 घंटे तक शहर में रहा। पुलिस का दावा था कि उसने सूचना मिलते ही नाकेबंदी कर दी थी औए संभावित थानों और जिलों को भी सूचित कर दिया था। लेकिन यदि नईम की  मानें तो वह न सिर्फ 4 घंटे रायगढ़ शहर में रह बल्कि वह यहां से अम्बिकापुर बस से गया । यदि छत्तीसगढ़ में उसके होने की बात करें तो वह लगभग 11 घंटे छत्तीसगढ़ में रहा लेकिन पता नहीं पुलिस ने क्या नाकेबंदी की थी वाहनुसे देख तक नहीं सके।

गोपालगंज में कोचिंग चलाया

अम्बिकापुर से अब्दुल नईम बनारस पहुंचा और बनारस से गोपालगंज पहुंचा जहां उसने कोचिंग खोलकर बच्चों को पढ़ना शुरू कर दिया। नईम कंप्यूटर इंजीनियर है और इसी का लाभ उसने उठाया। इसके बाद वह सिवान बिहार में भो रहा। इसके बाद वह जम्मू कश्मीर गया और फिर लखनऊ जहां वह पकड़ा गया।

विदेश भागने के फिराक में था

आतंकी नईम इस काम से अलग होना चाहता था, और अब इंसान की ज़िंदगी जीने चाहता था। लेकिन कानून चारों तरफ अपनी जाल बिछाए थी। वह विदेश जाना चाहता था ताकि जिंदगी नाइ शिरे से शुरू कर सके।लेकिन उसका पासपोर्ट यादव आ रहा था उर अंततः वह पासपोर्ट के कारण ही पकड़ा भी गया। हालांकि उसने गोपालगंज में राशन से लेकर आधार कार्ड तक बनवा चुका था।

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