Friday, November 16, 2018
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नक्सलबाद मिटाने पहुचे पूलिस अधिकारियों से छात्रों ने पूछा अजीब सवाल…..

बस्तर से  धर्मेन्द्र सिंह  की मुनादी

 

 

बस्तर को नक्सलवाद से  मुक्त करने के लिए अभियान चलाया जा रहे हैं ।इस अभियान के तहत जिला मुख्यालय कालेज में पुलिस के द्वारा छात्रों के साथ चर्चा की गई जिसमें छात्रों ने पुलिस अधिकारियों से सवाल किया की नक्सलियो का सफाया कब होगा??

सभी वरिष्ठ अधिकारियों एवं जिले के पुलिस कप्तान  अभिषेक मीणा  के मार्गदर्शन में शांत, सुंदर और समृद्ध बस्तर की कल्पना को लेकर एस.डी.ओ.पी. सुकमा रामगोपाल करियारे के नेतृत्व और पुलिस अनुविभाग सुकमा टीम के सहयोग में संचालित मित्रवत पुलिस-सुकमा पुलिस नक्सल मुक्त बस्तर अभियान के तहत अत्यंत संवेदनशील और नक्सल प्रभावित क्षेत्र सुकमा के दूरस्थ और मुख्यधारा से दूर के गांवों से आकर जिला मुख्यालय के शहरी क्षेत्र में स्थित महाविद्यालय में अध्ययन करने वाले वाले छात्र छात्राओं के बीच पहुँची। इस बहुद्देशीय अभियान के सौजन्य में अभियान के उद्देश्यों पर प्रकाश डालने रेंज के डी आई जी  पी. सुंदरराज  जिले के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जितेंद्र शुक्ला , एस डी ओ पी रामागोपाल करियारे एवं पुलिस स्टाफ शहीद बापुराव महाविद्यालय सुकमा के शिक्षा परिसर पहुंचे। जहाँ महाविद्यालय के प्राचार्य के साथ सभी प्राध्यापक, तीन विभिन्न कॉलेजों से आये विद्यार्थीगण, एवं कालेज के समस्त स्टाफ उपस्थित रहे।

 

सर्व प्रथम माँ सरस्वती के छायाचित्र पर माल्यार्पण अर्पित कर एवं अतिथियों को पुष्पगुच्छ भेंट कर अभियान की उद्देश्यों पर पुलिस अधिकारियों द्वारा क्रमशः उद्बोधन देकर प्रकाश डाली गई।डी आई जी सुंदरराज  द्वारा शिक्षा के व्यापक महत्व पर प्रकाश डालते हुए, क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के हेतु युवाओं को आगे आने के लिए आह्वान किया गया े ,ताकि शैक्षणिक अज्ञानता से उचित अनुचित की समझ के अभाव में भटकते हुए मुख्यधारा से दूर अरण्यवासी, क्षेत्र के भोले भाले युवा हिंसा और विकासविरोधी कार्यों में संलग्न न हो पाएं।उन्होंने कहा कि वे भारत के साउथ में जन्म लेने और शिक्षा दीक्षा के साथ साथ बचपन और युवावस्था इसी क्षेत्र में व्यतीत होने के कारण सुकमा की गोंडी भाषा को मातृ भाषा की तरह समझते है और कई शब्दों की समानता को उन्होंने बताया कि तमिल और गोंडी में कितनी समानता है। बच्चों के इस सवाल पर कि नक्सली वास्तव में क्या चाहते है? उन्होंने कहा कि वास्तव में नक्सली आम भोले भोले आदिवासियों को आप लोगों की तरह बनने नहीं देना चाहते आज अगर आप लोग यह सवाल पूछने लगे तो यह शिक्षा के कारण उचित अनुचित की समझ का विकास है उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यक्ति के व्यापक दृष्टिकोण के विकास का माध्यम होता है और नक्सली अपनी वजूद की सुरक्षा एवं नक्सल वाद को जीवित रखने के लिए कभी नहीं चाहते कि आम जनमानस पढ़े लिखे और  व्यापक हित अहित को सोच पाये। उन्होंने कहा कि अभी छत्तीसगढ़ बाल्यावस्था से युवावस्था में है वही सुकमा तो अभी बालपन में है जिसकी  सकारात्मक विकास हम सबके हाथ मे है अतः सबको शांति के मार्ग का अनुशरण कर देश विरोधी और विकास विरोधी मार्ग त्याग कर भटके हुए लोगों को मुख्य मार्ग में लाने के प्रयास किये जायें।

अभियान के दौरान नक्सल वाद की खात्मे कब होगी पूछे जाने पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शुक्ला सर ने छात्रों को कहा कि पुलिस और फोर्स निरंतर शांति की स्थापना हेतु नक्सल मुक्त बस्तर हेतु दुश्मनों से लोहा ले रही है लेकिन आम जनों की भी जिस दिन अपनी नैतिक जिम्मेदारी और अपने ऊपर हो रहे नक्सल ज्यादतियों की एहसास पर उनके लिए विरोध की भाव पैदा हो जाएंगे उस दिन नक्सल वाद स्वतः समाप्त हो जाएगा।

 

इस दौरान एस डी ओ पी  रामगोपाल करियारे ने कहा कि सुकमा की धरती वीर सपूतों की शहादत और रक्त से सिंचित है और सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, संचार, पानी, बिजली, आदि मौलिक सुविधाओं के विकास के लिए हमने बहुत कीमत चुकाया है आज आम जनता को यह सोचने की जरूरत है कि *””आखिर यह किसके लिए””?* आजाद भारत के इस क्षेत्र में अगर नक्सलवाद विकास का अवरोधक है तो इसके लिए हम सबको मिलकर समझना होगा कि प्रत्येक विभाग और प्रत्येक नागरिक जिन्हें स्वतः कुछ अधिकार प्राप्त है उनका उपयोग विकास विरोधी गतिविधियों को प्रसारित होने से रोकने में लगा सकते है और उन्होंने कहा कि जिस दिन यहाँ के विद्यार्थी डॉ, इंजीनियर, वकील, वैज्ञानिक, आई ए एस , आई पी एस. के साथ विभिन्न उच्च पदों पर विराजमान हो जाएंगे उस दिन नक्सलवाद का नामों निशा नही स्वतः खतम हो जाएगी।

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