Tuesday, June 19, 2018
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जायदाद होने के बावजूद नौ साल से मंदिर में रहने मजबूर वृद्धा, सौतन ने हड़प ली संपत्ति, अधिकारिओं के दरवाजे खटखटाकर अब थक गयी

 

रायगढ़ मुनादी

जब से उसके पति की मौत हुयी तब से वह दर दर की ठोकरें बस खा रही है , उसे रायगढ़ के एक मंदिर में सहारा मिला है वहां पिछले ८ सालों रह रही है. ऐसा नहीं की उसके पास कोई जायदाद नहीं है, ख़रसिया में उसके पति की मिलकियत है लेकिन उसके सौतन और सौतेले बेटे ने उसकी अनुपस्थिति में उसे बेदखल कर दिया. तब से लेकर आजतक वह बस अधिकारिओं के दरवाजे खटखटा रही है, मगर कोई सुनता नहीं.
म्हारी सौतन के छोरे ने म्हारे को घर से बेदखल कर दिया स, मारी सुनवाई कित्तो को नै होती साहब ! तम हमना म्हारा पुरखौती वाला घर दिला दो ! यही कहकर महिला गोमती अग्रवाल कलेक्टर शम्मी आबिदी के सामने रो पड़ी. गोमती की शादी खरसीया निवासी चंद्रभान अग्रवाल से
पचपन साल पहले हुयी थी, उसकी दो बेटियां भी हैं जिनकी शादी हो गयी. इसी दौरान उसके पति ने एक महिला को ले आया और उसे भी अपने घर में रख लिया. जब घर में झगड़े शुरू हुए तो दोनों को अलग अलग घर दे दिया गया . दोनों अलग रहने लगे. फिर २७ सितम्बर २००९ को उसकी पति की रहस्मय ढंग से मौत हो गयी जिसकी
लाश रेलवे ट्रैक के किनारे मिली. बाद में उसके सौतन ने उसकी अनुपस्थिति में उसके स्वामित्व वाली माकन पर भी कब्ज़ा कर लिया. यह महिला दर दर की ठोकरें खाने मजबूर हो गयी. अब वह फिर से अपनी आवाज अधिकारिओं तक पहुँचाने में जुटी है.

 

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