Sunday, July 15, 2018
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गाँव के लोगो ने जन सुनवाई का किया बहिस्कार, जानिये कहाँ करा दिया गया जन सुनवाई और किसके लिए ,,,,,

रायगढ़।मुनादी

जिले में रेल कॉरिडोर के अलावा ntpc लारा प्रोजेक्ट के लिये रेल लाइन का निर्माण चल रहा है कई स्थानों पर बिना मुआवजा, पुनर्वास व बोनस दिए किसानों की जमीन पर दबंगई के साथ रेल लाइन के लिए पटरी बिछाने का काम चल रहा है। ऐसा ही तमनार ब्लॉक के वनइ गाव के किसानों की जमीन लेने के लिए जन सुनवाई का आयोजन किया गया था।जहाँ ग्रामीणों द्वारा जन सुनवाई का बहिष्कार किये जाने की खबर आ रही है।

इस मामले में मिल रही जानकारी के अनुसार गाव वाले दूसरे गाव के प्रभावितो की स्तिथि को देखते हुए जन सुनवाई का विरोद्ध किया। दर असल ntpc एक सेंट्रल प्रोजेक्ट है लेकिन स्थानीय प्रोजेक्ट अधिकारी सेंट्रल गोवर्नमेंट को न सिर्फ गुमराह कर लाखो करोडो का एन केन प्रकारेण गोल माल करते हुए स्थानीय प्रभावितो को बर्बाद करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही है अंदरूनी सूत्रों की माने तो इस प्रोजेक्ट के बड़े अधिकारी जिस तरह से ग्रामीणों का हक मार कर उनकी जमीन हथिया रहे है बताया जा रहा है कि इसमें एक बड़ी लॉबी काम कर रही है जबकि दूसरे जगहों के इसी ntpc प्रोजेक्ट प्रभावितो को सेंट्रल की आर आर पॉलिसी का पूरा लाभ मिला है वही रायगढ़ जिले के ntpc लारा प्रोजेक्ट में ठीक विपरीत काम हो रहा है।

यहां ये भी बताना लाज़मी होगा की तमनार ब्लॉक के कई गाव के प्रभावितो को पॉलिसी का बिना लाभ दिए उनकी जमीन और फसल को बर्बाद कर कब्जे में लिया जा रहा है।

इस पुरे मामले में एक ख़ास बात और ये है कि ntpc द्वारा अधिग्रहित जमीन से अधिक पर भी कब्जा किया जा रहा है लेकिन गाव वालो को कानून का भय व डरा धमका कर अधिक ज़मीन पर बेधड़क कब्ज़ा करते हुए रेल लाइन बिछाने का काम चल रहा है।

एनटीपीसी के वनई तमनार गाव कि जनसुनवाई जो 9 अप्रैल सोमवार को रखी गई थी यहाँ ग्रामीणों की उपस्तिति नहीं के बराबर रही। बताया जा रहा है कि ग्रामीणों द्वारा सुनवाई का ये कहते हुए विरोध किया गया कि उनसे पहले ग्राम सभा की न तो noc ली गई है और न ही पुनर्वास को लेकर प्रसासन दूसरे प्रभावितो को व्यवस्था दे रही है इर न लाभ दे रही है।
क्या राय है सामाजिक कार्यक्रर्ताओ की-
NTPC रेल लाइन प्रभावितो को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता राजेस त्रिपाठी का कहना है कि अनुसूचि 5 के अंतर्गत प्रावधानों का पालन नहीं किया जा रहा है जिसका खामियाजा यहां के आदिवासियों को भुगतना पड़ रहा है इस अनुसूची के अंतर्गत आने वाले एरिया में कई नियमो का पेच है जिसका खुल कर उल्लंघन हो रहा है।

इसे लेकर सामाजिक कार्यकर्ता सविता रथ का कहना है कि प्रभावित ग्रामीणों की दशा बेहद दयनीय है। अपनी जमीन से कम से कम ये लोग अपने परिवार का पेट तो पाल लेते थे। 4 गुना मुआवजा का प्रलोभन देकर ग्रामीणों को ठगा गया है।

 

यही वजह है कि जहाँ जन सुनवाई की फॉर्मेलिटी की जा रही है वहां ग्रामीण विरोध कर रहे है। ज़मीन 4 गुना मुआवजा पर ही देने की बात कर रहे है। इसके पीछे जो लॉजिक बताई जाई रही है वो ये है कि चाहे जैसे भी हो किसान इसी ज़मीन से अपना और परिवार का भरण पोषण करते आ रहे मुवावजे की जो राशि मिल है वो तो चंद दिनों में खत्म हो जायेगी जबकि ntpc उनकी जमीन का प्रोजेक्ट के जीवन पर्यन्त उपयोग करते रहेगी इसीलिए ग्रामीण 4 गुना मुआवजा और पुनर्वास नॉकरी की मांग करते हुए सुनवाई का विरोध कर रहे है।

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