Friday, September 21, 2018
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अब निशाने पर खुड़िया दीवान !कोरवा समाज के पंचायत में समाज के ही लोगो ने उठाया ‘बघेल क्षत्रीय’ का मुद्दा

जशपुर मुनादी ।।

जाति को लेकर कोरवा समुदाय के अंदर अब घमासान शुरू हो गया है । कोरवा समुदाय के अंदर कोरवा समुदाय के प्रणेता कहे जाने वाले खुड़िया दीवान की जाति को लेकर खुद समुदाय के लोगों ने ही हल्ला मचाना शुरू कर दिया है ।बीते दिनों सुरगुजा जिले के लुंड्रा तहसील अंतर्गत आने वाले सिलसिला गाँव मे प्रदेश के 8 जिलों के कोरवा समुदाय के लोग जमा हुए । सभा मे इस समुदाय को लेकर सरकार की बनायी गयी नीतियों जहां खुलकर विरोध हुआ वही इस समुदाय के भीतर’ बघेल क्षत्री ” समाज के लोगो के सामाजिक अतिक्रमण का भी मुद्दा उठाया गया ।

  • समाज का एलान और फैसला

 

समाज के महापंचायत में शामिल होने आये समाज के नेताओं ने कहा कि —

हमारे कोरवा समाज के लोगों को अपने राजनीतिक लाभ लेने के लिए बहला फुसला कर इनका प्रयोग कर रहे हैं !  “बघेल क्षत्रीय जाति” “अनुसूचित जनजाति” के अन्तर्गत नहीं आते हैं , ये जानकारी हमें “अनुविभागीय अधिकारी राजस्व” बगीचा से प्रदत्त दस्तावेज से प्राप्त हुआ है ! छत्तीसगढ़ शासन के द्वारा  जिसे पहाड़ी कोरवा मान रहा है, केवल उनका ही सर्वे किया है , जिनकी संख्या २००५ में जशपुर जिले में,केवल – १३००० (तेरह हजार ) ही दिखाया है, इसमें कुछ को कोरवा , कुछ को डिहारी कोरवा कहकर उनको सर्वेक्षण से बाहर कर उनकी जनसंख्या के आंकड़े को दबा कर रखा है ! और शासन के योजनाओं के लाभ से वंचित कर रहा है ! शासन के द्वारा कोरवा जाति की जनसंख्या का बताया गया आंकड़ा केवल १० से *१२* प्रतिशत् ही है , जबकि जशपुर जिले में इनकी जनसंख्या *१,३०,०००* से *१,४०,०००* के बीच है !           इन्हीं सब विषयों पर चर्चा करते हुए  *छत्तीसगढ़ कोरवा जनजाति संघ के अध्यक्ष राम प्रसाद साय कोरवा के* अध्यक्षता में यह निर्णय लिया गया है -:-   कि छ.ग. शासन के द्वारा राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र जनजाति *कोरवा* समुदाय को भौगोलिक क्षेत्र के आधार पर अलग-अलग जाति में न बांटे ! *(२)* कोरवा समाज के सभी लोगों का जाति प्रमाण पत्र बनना चाहिये , जिससे कोरवा समाज के सभी बच्चों को सही शिक्षा दिलाकर उनके जीवन स्तर में सुधार ला सकें !   *(३)*   कोरवा समुदाय के अन्दर *घुस पैठियों* को जगह न दें ! घुस पैठियों के होने से खतरा बढ़ जाता है !  *(४)*  बघेल क्षत्रीय जाति अनुसूचित जनजाति के अन्तर्गत नहीं आता है , जिसके बारे में राजस्व न्यायालय का अवलोकन करने के पश्चात यह निर्णय सभी *९* जिले के कोरवा समुदाय के लोगों के द्वारा सर्व सम्मति से यह निर्णय लिया गया है कि बघेल क्षत्रीय कोरवा जनजाति के अन्तर्गत नहीं आयेंगे ! क्योंकि बघेल क्षत्रीय *राजपुत की श्रेणी* में आते हैं ! और राजपुत *सामान्य वर्ग* की श्रेणी में आते हैं !  *अगर बघेल क्षत्रीय* जाति *राजस्व संबंधित रिकार्ड*  *(मिशल बंदोबस्त एवं अधिकार अभिलेखों* के कारण *जाति* में त्रुटी है तो अपनी रिकार्डों की सुधार स्वयं करायें ! और कोरवा जनजाति होने का प्रमाण बनवायें !   *(५)*  छ.ग. शासन के द्वारा पूरे छ.ग. के कोरवा जनजातियों के लोगों का नये सिरे से सर्वेक्षण कराकर सही आंकड़ा पेश करें  ! एवं सभी कोरवा परिवार को शासन से प्राप्त योजनाओं का लाभ को समान रुप से प्रदान करें !

 

यह है सियासत का सच !

 

हम आपको बता दें कि अभी विरसा मुंडा जयंती समारोह के दौरान जशपुर जिले हजारो पहाड़ी कोरवाओं का जशपुर में भारी जमावड़ा लगा था ।सरकार की विसंगतियों के ख़िलाफ़ जिला मुख्यालय में आवाज बुलंद करने पहुचे हजारो पहाड़ी कोरवाओं की आवाज उठे न उठे लेकिन इसके बाद इस कार्यक्रम के बाद उठा पटक इतना हुआ कि बात दिल्ली तक पहुच गयी। इस दौरान पहाड़ी कोरवा नेता रामप्रसाद कोरवा और खुड़िया दीवान दोनों ने अलग अलग मोर्चा खोलकर एकदूसरे पर सियासी हमला करना शुरू कर दिया था । इनके विरोधाभाषी बयान कई दिनों तक मीडिया और सोशल मीडिया की सुर्खियों में रही । इस घटनाक्रम के शांत होने के बाद कोरवा नेता राम प्रसाद कोरवा द्वारा बघेल जाति का मुद्दा उठाकर समुदाय को अलग संकट में डाल दिया है। क्योंकि खुड़िया दीवान प्रदीप नारायण सिंह को शुरू से कोरवा समुदाय का अग्रणी नेता माना जाता रहा है लेकिन कुछ महीने या साल से इनकी जाति को लेकर विवाद खड़ा हो गया ।बताया जा रहा है कि दीवान प्रदीप नारायण बघेल क्षत्री समाज से हैं जो कि पहाड़ी कोरवा तो क्या आदिवासी भी नही होते ।

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