Thursday, January 18, 2018
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संवैधानिक नियमों का अतिक्रमण कर लाया गया भू राजस्व संशोधन विधेयक, अब कांग्रेस ने भी उठायी उंगली

 

रायपुर मुनादी 

कांग्रेस अनुसूचित जनजाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष शिशुपाल सोरी पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि 5वीं अनुसूची, और पेशा कानून से संबंधित क्षेत्र में सरकार जमीन अधिग्रहण नहीं कर सकती। इस पर कानून बनाने का अधिकार विधानसभा को भी नहीं है बल्कि ट्रायबल एडवाइजरी काउंसिल को कानून बनाने का अधिकार है। इसके लिए कानून बनाने का अधिकार राज्यपाल को है
इस संसोधन विधेयक को राज्यपाल ने अनुमति नहीं दी है। राज्यपाल को अधिकार है कि इस कानून को रोक सकें। संवैधानिक प्रावधानों का घोर उल्लंघन हुआ है। 165 (6) के उपबंध क्रय नीति के तहत लागू नहीं होगी।

शौरी ने आगे कहा कि सरकार आदिवासी है या नहीं है पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सरकार व्यक्ति है। फिर कोई व्यक्ति कैसे आदिवासी की जमीन ले सकता है। सरकार आदिवासी नहीं है। विकास के लिए अनिवार्य भू अर्जन की व्यवस्था की गई है। हम आदिवासी हैं विकास विरोधी नहीं है। 2013 के अधिनियम को तोड़ने का प्रयास भाजपा सरकार ने कई बार किया। राज्य सरकार ने आदिवासियों की जमीन लेकर कैसे बड़े उद्योगों को दिया जाए इसलिए यह कानून लाया गया है। आदिवासी क्षेत्र में स्कूल, कालेज, अस्पताल के लिए जमीन नहीं मिलने की बात कह रहे हैं। अब तक ऐसा एक भी प्रकरण नहीं आया जब आदिवासियों ने विकास कार्य के लिए जमीन देने से मना किया हो।

शौरी ने आरोप लगाते हुए कहा कि 165 (6) केवल अधिसूचित क्षेत्र के लिए है जहां छग में आज भी 65 फीसदी अधिसूचित भू भाग है। सरकार को आदिवासियों की चिंता नहीं है। रायगढ़ सरगुजा जशपुर में क्रय नीति के तहत जमीन ली गई है। किसानों आदिवासियों से जमीन हथियाने के किये कानून लाया गया है।

शौरी ने राज्य सरकार से पूछा कि कल मंत्रियों ने 10 गुना दाम देने की बात कही। जब अधिकार ही नहीं है तो जमीन कैसे लेंगे। संवैधानिक प्रावधान बनाने के पहले  उनकी राय ली जानी चाहिए। आदिवासी समाज के साथ अन्याय हो रहा है।

विधायक मोहन मरकाम ने कहा, विधानसभा में भी इस मामले को लेकर हमने वोटिंग मांगा था। इसे सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने के लिए हमने कहा था। आदिवासी मंत्रणा समिति के पास इसे भेजने की बात हमने कही थी। पेशा कानून, 5वीं अनुसूची , भूमि अधिग्रहण कानून 2013 का उल्लंघन करके यह कानून लाया गया है। हमने नगरनार, लोहंडीगुड़ा के लिए आदिवासियों ने अपनी जमीन दी है। देश मे सबसे अच्छी पुनर्वास देने की बात कहते हुए 2012 में नौकरी देने की बात कही गई, आज तक रोजगार नहीं मिल पाया है।

One thought on “संवैधानिक नियमों का अतिक्रमण कर लाया गया भू राजस्व संशोधन विधेयक, अब कांग्रेस ने भी उठायी उंगली

  1. मुद्दा लपकने और भुनाने में हमेशा लेट है कांग्रेस

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