Wednesday, November 21, 2018
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70 में से सिर्फ 5 वार्डों के फॉर्म की जांच में ही हो गई हाइजिन अवॉर्ड घोषणा… निगम में घमासान, होगी जांच

रायपुर मुनादी ।

नगर निगम रायपुर के सिटी हाइजिन अवॉर्ड के विजेता विवादों में फंस गए हैं। एमआईसी मेंबरों ने आरोप लगाया है कि 70 वार्ड में से सिर्फ 5 वार्डों के डॉक्यूमेंट्स की जांच के बाद अवॉर्ड घोषित कर दिया गया, जो कि संदेहास्पद है। मामले में विपक्षी नेताओं ने तो निगम के अफसरों को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। उनका कहना है कि निगम के अफसरों ने इस मामले में जनप्रतिनिधियों को शामिल नहीं किया। बंद कमरे में ही मूल्यांकन कर लिया गया। मामले में महापौर प्रमोद दुबे ने निष्पक्षता के लिए जांच कराने का आश्वासन दिया है।

एक दिन पहले नगर निगम के महापौर प्रमोद दुबे ने निगम रायपुर की ओर से सिटी हाइजिन अवॉर्ड रायपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड के साथ मिलकर मोर रायपुर स्मार्ट सिटी अभियान के तहत विभिन्न 6 वर्गों में विजेताओं के नामों की घोषणा की थी। घोषणा होते ही इसे लेकर अंदरूनी विवाद शुरू था। कुछ एमआईसी मेंबर्स ने इस पर आपत्ति करते हुए जल्दबाजी में यह अवॉर्ड घोषित करने का आरोप लगाया था। दूसरे दिन स्वास्थ्य विभाग के अध्यक्ष व एमआईसी मेंबर श्रीकुमार मेनन, सतनाम पनाग, समीर अख्तर आदि ने इसका विरोध किया। मेंबर्स ने इसमें पारदर्शिता नहीं बरतने और जल्दबाजी में अवॉर्ड घोषित करने का आरोप लगाया। एमआईसी मेंबर श्रीकुमार मेनन ने कहा है कि ऐसी जानकारी मिली है कि सिर्फ 5 वार्ड के ही डॉक्यूमेंट्स के आधार पर विजेताओं का नाम घोषित किया गया है। इस पर आपत्ति है।

इन वार्डों को बताया था विजेता

वार्डों के वर्ग में प्रथम स्थान मौलाना अब्दुल रउफ वार्ड क्रमांक 41, कालीमाती वार्ड क्रमांक 30, तृतीय स्थान संयुक्त रूप से पं. दीनदयाल उपाध्याय वार्ड क्रमांक 69, सिविल लाइन वार्ड क्रमांक 42 को देकर पुरस्कृत करने के लिए नाम घोषित किया गया था। दूसरे दिन कुछ पार्षद नगर निगम पहुंचकर घोषित किए गए वार्ड के प्रथम आने के मापदंडों की जांच कराने की मांग की।

इस मामले पर नगर निगम रायपुर के स्वच्छता मॉनिटर
हरेंद्र साहू ने बचाव सफाई देते हुए कहा कि हमारे पास सभी 70 वार्ड से डेटा आए थे। डेटा खंगालने के बाद ही अवॉर्ड घोषित किया गया है।

साथ ही साथ, नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष सूर्यकांत राठौर ने निगम अफसरों पर आरोप लगाते हुए कहा कि मुझे तो खुशी हुई थी कि एक नई व्यवस्था लागू हुई, लेकिन वह विवाद में आई, इससे दुखी हूं। इसमें अफसरों ने जनप्रतिनिधियों से कुछ नहीं पूछा और कमरे के भीतर मूल्यांकन कर लिया।

वहीं महापौर प्रमोद दुबे ने कहा कि मैं यदि किसी को इस अवार्ड को लेकर संदेह है और निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं तो इसकी जांच कराएंगे।

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