Wednesday, September 19, 2018
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इस सरकारी स्कूल में बच्चे बिना बस्ते के आते हैं पढ़ने, स्कूल में ही मिलती है अध्ययन सामग्री, ये खबर दिल्ली की नहीं

 

रायगढ़ मुनादी

 

 

दिल्ली सरकार ने शिक्षा के लिए जो काम किये हैं उसकी तारीफ पूरी दुनिआ में हो रही है लेकिन छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में जो बच्चों को बस्ता मुक्त करने की सरकारी कोशिश हुयी वह सुर्खिओं में भी नहीं. रायगढ़ जिला मुख्तलाय से १० किमी दूर कोरिया दादर के प्राथमिक विद्यालय में यह प्रयास किया गया है, अभी २ कक्षा के छात्र बस्ता के बोझ से मुक्त हुए हैं आने वाले दिनीन में स्कूल को बस्तामुक्त किये जाने की कोशिश है.

स्कूली बस्ते के बोझ काम करने की बात तो की जाती रही है लेकिन इस दिशा में कभी सार्थक प्रयास नहीं हुए खासकर सरकारी स्तर पर तो कभी नहीं. लेकिन कोरिया दादर के प्रधान पाठक सुनील गुप्ता के प्रयास से प्राथमिक शाला के दो कक्षा के बच्चीं को बस्ते के बोझ से मुक्त कर दिया गया है. बच्चे बिना बस्ते के स्कूल आते हैं
और बिना बस्ते के घर जाते हैं. बच्चों को स्कूल में ही अध्ययन सामग्री मिल जाती है. न होमवर्क का टेंशन न ही
बस्ते को उठाने का झंझट. मासूम बच्चे पर कई किलो बस्ते का बोझ गुप्ता के ह्रदय lको कचोटता था. उन्होंने अपने
अधिकारिओं से बात की और प्राथमिक कक्षा के पहली और दूसरी कक्षा के लिए बतौर प्रयोग शुरू किया है. यह
कोशिश सफल होती भी दिख रही है. आगे प्राथमिक कक्ष के सभी बच्चों पर इसे लागु करवाया जायेगा. हालाँकि इसके लिए न उन्हें अतिरिक्त पैसा मिल रहा है और न ही अतिरिक्त सुविधाएँ लेकिन गुप्ता ने इसे बतौर प्रयोग शुरूकर देश को यह सन्देश जरूर दिया है की प्लानिंग के
साथ किये जानेवाला हर काम सफल जरूर होता है.

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