Tuesday, June 19, 2018
Home > Slider > टेंडर पर जारी है ” टसन ” …कई और सवालों के साथ शुरू हुआ नया विवाद

टेंडर पर जारी है ” टसन ” …कई और सवालों के साथ शुरू हुआ नया विवाद

सच की मुनादी ।।

 

जशपुर के नगरीय निकायों के करोड़ो के टेंडर निरस्त पर निरस्त हो रहे हैं।पर कार्यवाई क्यों नही होती?यह हम नही कह रहे हैं बल्कि जशपुर जनमानस का हर व्यक्ति कह रहा जिसने कुछ समय से चाहे नगर पंचायत बगीचा,एवं कोतबा के काले कारनामो का खेल को muunaadi. com के खबरों के माध्यम से रूबरू हुआ,और प्रशाशन ने टेंडर निरस्त कर औपचारिकता मात्र को पूरा किया।पर सवाल तो है कार्यवाई क्यों नही!

 

क्या है सवाल ?

 

टेंडर तो निरस्त हुआ और हर जगह निकाय अधिकारी और कुछ जगहों पर प्रतिनिधि भी दागदार दिखे।पर सारी चीजें सार्वजनिक होने पर भी कार्यवाई क्यों नही होती?आखिर तो अपराध हुआ है ?अपराध की कोशिशें हुई है?टेंडर निरस्त होने पर अपराध तो खत्म नही हो जाता?

वाकई जो करोड़ों का खेल करते है, उनकी ऊंची पहुंच भी होगी।पर जीरो टॉलरेंस का बखान वाली सरकार क्यों चुपचाप तमाशा देखती है।ऐसा भी नही सरकार तो यहां इन निकायों में विपक्ष सिंबल वाले हैं,फिर इन भ्रस्टाचारों की कहानी क्या है? कि गड़बड़ियां सार्वजनिक हो तो निरस्त,नही तो चलता रहे!!

 

 

डैमेज कंट्रोल क्या है?

 

 

ऐसा भी कहा जा रहा है कि टेंडर निरस्त होने पर डैमेज को कंट्रोल किया जा रहा है।पर वित्तीय अपराधों पर कार्यवाई नही होना सरकार और प्रशाशन पर जनता के विश्वाश को कम करता है।और ये बात न तो सरकार की सेहत के लिए अच्छी है और न ही प्रशाशन के।अक्सर निकाय कर्मचारियों एवं अधिकारियों के मन मे यह भी धारणा है कि स्थानीय जिला प्रशाशन सीधे हम पर कार्यवाही तो कर नही सकता।हमारी तो संस्था ही अलग है।कार्यवाही होना आवश्यक इसलिए भी जरूरी है कि जनता का विश्वाश बना भी रहे,इस अराजकता पर कठोर प्रहार भी हो।

पर जो भी हो यहां तो टेंडर निरस्त कर ही यह मान लिया जा रहा है कि यही डैमेज कंट्रोल है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *