Tuesday, August 14, 2018
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नगर पंचायत को बना दिया नरक पंचायत,महकमा लगा वसूली में

देवेंद्र युवराज मिश्रा की मुनादी

 

स्वच्छ भारत अभियान को लेकर प्रधानमंत्री के आह्वान और मुख्यमंत्री की अपील को अफसर किस तरह पलीता लगा रहे हैं..उसका उदाहरण धमतरी जिला के नगर पंचायत नगरी  में देखने को मिल रहा है…… पसरी  गंदगी कार्यक्रम के 06 दिन गुजर जाने के बाद भी साफ नहीं हुई है। शर्मनाक और लापरवाही की इंतहा है,……दरअसल .दीपावली में फटाखा व्यवसाई हो द्वारा पटाखा लाकर बिक्री की जाती है …..शहर के बीचों बीच …नगर पंचायत नगरी के अधीनस्थ मैदान में  जहां तमाम तरह के शिक्षण संस्थान है….माशूम से लेकर 12 वी तक के स्कूली बच्चे तालीम सीखते है…..जिनके स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है……मगर नगरी के  पटाखा व्यवसाई को इनकी चिंता कहा है जिन्हें गुलाबी नोट की नशा के चकाचौन्ध ने अंधा कर रखा है……वही नगर पंचायत के जिम्मेदारी सरकारी महकमा………सिर्फ कर वशूली के लिए ही है……जिन्हें ना ही प्रदूषण का फिक्र है ना ही सरकारी सार्वजनिक स्थलों की रख रखाव की ……नगर पंचायत CMO की  माने तो नगर पंचायत ने एक व्यवस्था के तौर पर नगर पंचायत मैदान में प्रत्येक लायसेंस के पीछे 700 रुपये का टैक्स वशूली का प्रावधान बनाया गया था.…….जिन्हें वसूला गया है……..जबकि नगरी शहर वासियों के कुछ लोगों का कहना है कि सरकारी नियम के अनुसार स्कूल से लगे मैदान में  फटाका दुकान नहीं लगाने का निर्देश कोर्ट द्वारा जारी किया गया था…… मगर यहां के लोगों द्वारा इन सभी चीजों को ताक में रखकर स्कूल के ही मैदान में फटाका दुकान लगा दिया……… गया जोकि नगर पंचायत नगरी के सामने में ही यह मैदान स्थित है और इस मैदान के कुछ ही दूर में पूरा स्कूल स्टाफ रहता है एवं कुछ दूर में जनपद द्वारा बनाया गया व्यवसायिक कांप्लेक्स नगर पंचायत भवन है अगर कुछ फटाका दुकान में अनहोनी हो जाती है तो सभी के ऊपर खतरा मंडराता नजर आता है…. मगर यहां इन सब चीजों की चिंता शायद प्रशासन को भी नहीं साथी फटाका व्यवसाइयों द्वारा बारूद से भरे हुए झिल्लियों को मैदान में  ही छोड़ दिया गया जिसके चलते खेलने वाले बच्चे परेशान होते नजर आए और वही उस झिल्लीयो को पशु  खाते है…. नजर आए जिससे गायों की मौत भी संभव है इन सब चीजों की अनदेखी किया जाना कहां तक सही है। रहा सवाल इस मैदान में खेलने वाले खिलाड़ियों की एक तरफ तो शासन बच्चों के खेलने के लिए लाखों-करोड़ों खर्चा करती है वही इस नगरी में ना बच्चों के खेलने के लिए कोई कुछ है ना ही कोई सुरक्षित मैदान मैदान भी है तो  वहां व्यवसायिक मैदान बनकर रह गया जहां आए दिन कुछ ना कुछ कार्यक्रम एवं व्यवसायिक दुकाने लगती रहती है जिसके चलते मैदानों में गड्ढे कर दिए जाते हैं जिस गड्ढे को बंद करने की जवाबदारी भी किसी की नहीं बनती है क्या शासन उन बच्चों की भावनाओं को समझेगा ।

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