Tuesday, August 14, 2018
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आक्रोश काफी बढ़ता जा रहा है अगर समय रहते सही कदम नही उठाया तो ,…….नदियां संकट में ……… जीव जगत पर संकट ……… जनता का तीव्र जन आंदोलन

रायगढ़ मुनादी

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

नदियाँ मर गई तो जीवन और जीव जगत संकट में पड़ जाएगा।सृष्टि का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा। पूरा विश्व आज इस गंभीर संकट से गुजर रहा है। छत्तीसगढ़  रायगढ़ जिले में प्रमुख  नदियों केलो,महानदी और मांड
इन तीनों नदियों का अस्तित्व संकट में है।जलस्रोतों तालाबों को भी बचाने का कोई खास प्रयास नहीं किया जा रहा है।सत्ता पक्ष की राजनैतिक पार्टी ने तो तालाब पर विशाल पार्टी कार्यालय बना लिया है।क्या यह देश के माथे पर कलंक  नहीं है? क्या इस सरकार से जलस्रोतों को नदियों को बचाने की उम्मीद की जा सकती है?
रायगढ़ की जीवन दायनी केलो नदी पर बाँध बनने के बावजूद शहर के मध्य चक्रपथ कलेक्टर कार्यालय मार्ग के पास आते आते केलो मर सी जाती है। गंदगी के ढेर, कचरों, मलवों, गड्ढे गड्ढों में गंदे प्रदूषित पानी के अतिरिक्त कुछ दिखाई नहीं पड़ता। किसानों को कृषि के लिए पानी नहीं, आम नागरिकों को पीने के पानी का संकट । सवाल यह उठता है कि बांध बनने के बाद भी ऐसा संकट  क्यों?  बांध की आखिर क्या उपयोगिता है?

सबसे गंभीर चिंता का विषय है कि अगर ऐसा ही रहा जनता और प्रशासन ने कोई ध्यान नहीं दिया तो 10-15 वर्षों बाद और आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी की गंभीर समस्या पैदा होगी ।अगर अभी से कोई उचित पहल  नहीं किया गया तो एक एक एक बूंद पानी के लिए हाहा कार मचेगा। सरकार की गलत नीतियों के कारण महानदी को लेकर ओड़िशा और छत्तीसगढ़ में तनाव बढता जा रहा है ।आश्चर्य की बात है कि दोनों सरकारों के पास कोई जल नीति नहीं है।दोनों सरकारों को चाहिए कि पहले वे अपने अपने प्रदेश की जल नीति घोषित करें। जलस्रोतों नदी तालाब जलाशयों के संदर्भ में एक श्वेत पत्र जारी करे।अपने सत्ता और अवैध धन लाभ के लालच में जनता को गुमराह न करें।

जिला बचाओ संघर्ष मोर्चा रायगढ़,जनसंगठनो, समाजिक सांस्कृतिक संस्थाओं, पत्रकारों, पर्यावरण विदों, चिकित्सकों एवं प्रबुद्ध नागरिकों ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए बार बार शासन एवं प्रशासन को पत्रों,ज्ञापनों,वार्ताओं,रैलीओं,प्रदर्शनों के माध्यम से अवगत कराया पर शासन प्रशासन गंभीर दिखाई नहीं पड़ता । सरकार  उद्योगों द्वारा फ्लाइएश की मनमानी डंपिंग को सख्ती से रोक नहीं लगा पा रही है।एक वृहत ड्रेनेज सीवरेज सीस्टम वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के  निर्माण के लिए प्रशासन गंभीर नहीं हो पा रहा है और न ही उद्योगों द्वारा पानी के मनमाने अंधाधुंध दोहन को रोक पा रही है।
जनता में आक्रोश काफी बढ़ता जा रहा है। अगर समय रहते सही कदम नही उठाया गया  तो जनता तीव्र जनआंदोलन के लिये बाध्य होगी जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन व प्रशासन की होगी।

गणेश कछवाहा

ट्रेड यूनियन, जिला बचाओ संघर्ष मोर्चा

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