Monday, April 23, 2018
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एक और फजीहत :जिनके नाम पर चुनाव जीतते आये उन्ही के नाम का मुख्य द्वार  नही बनवाया ,अब यहां भी होगा बिधायक का विरोध 

रनपुर मुनादी ।।

 

चुनावी वर्ष शुरू होते ही पिछले सत्र में चुनाव जीतने वाले बिधायको का भी सामाजिक अंकेक्षण शुरू हो गया है । पिछले चार वर्षों में नेता जी ने क्षेत्र के लिए क्या किया और क्या नही किया इसका हिसाब किताब लगना शुरू हो गया है । इस हिसाब किताब के पहले पन्ने की बात करें तो पहला पन्ना स्व कुमार दिलीप सिंह जूदेव के चहेते गांव रनपुर का है ।यहां के लोगों का आरोप है कि बीते 13 वर्षों में इस गाँव मे बिधायक मद से कोई भी ऐसा विकास कार्य नही हुआ जिससे यहां के जनमानस को लाभ पहुचे । 

 

 

     यहां के ग्रामीणों का कहना है कि ——–

 

जशपुर विधानसभा छेत्र में आने वाले रनपुर गांव में अब तक विधायक मद  से जनहित में कोई विकास कार्य नहीं हुए। यहां तक कि कि बिधायक मद से स्व कुमार साहब के नाम से मुख्य द्वार तक की मांग पूरी नही हो सकी ।जशपुर विधानसभा के अंतिम छोर में बसा रनपुर पंचायत में तीनों विधायक की अनदेखी होती रही है।  जिले से लेकर राज्य और केंद्र तक भाजपा की सरकार  है फिर भी भाजपा विधायकों को अधिक मद से लीड  देने वाले  गांव को अब भी विधायक निधि से कोई कार्य मिलने की आश  है ।स्थानीय लोगों के द्वारा कई बार बिधायक से  स्वागत गेट , शौचालय , यात्री  प्रतीक्षालय सहित कई सुविधा की मांग की गई लेकिन विधायक ने सिर्फ और सिर्फ आश्वासन  दिया ।ग्रामीण को जशपुर विधायक राज शरण भगत के ऊपर  उम्मीद है कि आखिरी साल में ही सही चुनाव से पहले गाँव का कुछ भला हो जाय ।जबकि कुछ जनप्रतिनिधियों ने अब  विधायक फंड से आस लगाना भी छोड़ दिया है ।

 

 

 अब तक सबसे ज्यादा फजीहत इन्ही बिधायक की हुई है

 

 

रनपुर गांव स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव का प्रिय ग्राम था जहां की जनता का हाल चाल पूछने वे माह में एक बार रनपुर जरूर आते थे इस लिहाज से ग्रामीणों को यह उम्मीद थी कि कुमार साहब के सबसे चहेते बिधायक से मांग करने पर उनके नाम का मुख्य द्वार स्थापित हो जाएगा लेकिन अब तक रनपुरवासियों की उम्मीद पूरी नही हो पायी ।हम आपको बता दें कि इस चुनावी वर्ष में अब तक अगर जिले में किसी बिधायक की सबसेज्यादा किरकिरी हुई है तो वह हैं जशपुर बिधायक राजशरण भगत । अभी 2 दिन पहले ही जिले के कलिया गाँव मे 4 सालों से अनदेखी करने के चलते इन्हें ग्रामीणों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा था नतीजतन बिधायक राजशरण और उनके समर्थकों को कार से जनसम्पर्क यात्रा करनी पड़ी थी ।

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