Monday, December 17, 2018
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इंकलाब सुलग रहा जन-जन में इस नारे ने आजादी के आंदोलन का बदल दिया था इतिहास, यहां अब क्या होने वाला है ?

रायगढ़ मुनादी

 

 

 

 

 

 

 

 

 

इस आंदोलन के नाम ने आजादी के लिए इतिहास बदल दिया गया और इंकलाब के नारो ने अंग्रेजो के जेलों को भर दिया था और आजादी के दीवानों ने जब अंग्रेजों की चूलें को हिला दिया तो ये तो आजाद भारत के उद्योगिक घरानो के शोषण तो बस प्रशासनिक समर्थन ही मिल रहा है और जब तक मिल रहा है जब तक इंकलाब पूरा दम न भर ले।
ऐसा ही कुछ ntpc को लेकर देखने मिल रहा है हड़ताल चौक छपोरा में 28 वें दिन भी हड़ताल जारी रहा। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण आंदोलन से अपनी बात मनवाने के लिए हम प्रतिबद्ध है और हमारा आंदोलन इसी तरह जारी रहेगा। प्रशासन, जिसकी जिम्मेदारी है कि वह हमारे मांगों को एनटीपीसी से मनवाएं, परंतु प्रशासन अपनी जिम्मेदारी से जी चुराती हुई नजर आ रही है, लेकिन आंदोलनकारियों का हौसला और जनसंख्या कम नहीं हो रहा है। आज धरना स्थल पर महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी उनका कहना है कि हमारे बेटे – बेटीयों को एनटीपीसी में स्थाई नौकरी मिलनी चाहिए। इस के लिए किसी भी प्रकार का आंदोलन करने के लिए हम तैयार हैं।
आगामी आंदोलन के क्रम मे क्रमिक भूख हड़ताल की तैयारी जोर शोर से है। हड़ताल के लिए लगभग 100 आंदोलनकारियों की सूची बन गई है। इस तरह के शांतिपूर्ण हड़ताल पर प्रशासन को ध्यान देना चाहिए। क्योंकि जिस तरह से एनटीपीसी की मनमानी चल रही है, उस तरह से प्रभावितों का मन भी व्याकुल हो रहा है। जिससे क्षेत्र में असंतोष बढ़ रहा है। कृषि भूमि पर जबरन कब्जा, नौकरी की समाप्ति, भूमिहीनों को रोजगार ना देना, तेंदूपत्ता का कम मुआवजा तथा फर्जी पुनर्वास जैसे कई मुद्दों पर क्षेत्रवासी एकजुट होते नजर आ रहे हैं। जिससे आंदोलन का आगामी स्वरूप क्या होगा, यह समय पर ही निर्भर करता है।
एनटीपीसी तथा प्रशासन को आंदोलन की मांगों को पूरा करने के लिए सार्थक प्रयास करने चाहिए अन्यथा इंकलाब की जिम्मेदारी का बोझ भी उन्ही के ऊपर होगा।

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