Wednesday, December 19, 2018
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सरकार पर फिर सवाल, फ़र्ज़ी मुठभेड़ बताकर मारते हैं आदिवासियों को, अब अर्द्धसैनिक जवान ने भी कहा

 

रायपुर मुनादी।।

 

अपने ही चार साथी के हत्या के आरोपी जवान संतराम ने बयान देकर सनसनी फैल दी है कि बस्तर में पुलिस और जवान सीधेसादे ग्रामीणों को नक्सली बताकर मारते हैं और मुखबिर बताकर जेलों में ठूंस देते हैं।

अब तक सरकार पर यह आरोप लगता रहा है कि पुलिस और अर्धसैनिक जवान आदिवासी ग्रामीणों को नक्सली बताकर मार देते हैं, नक्सलियों का मुखबिर बतकर ग्रामीणों को जेलों में बंद कर देते है। वहां की सामाजिक संस्थाएं, राजनीतिक दल, के आदिवासी संगठन यहां तक कि सरकारी अधिकारी और जज ने भी ऐसा कहा और सरकारी प्रताड़ना के शिकार हुए। अब यही बात एक अर्धसैनिक बलबके जवान ने भी कही है। हालांकि उसपर अपने चार साथियों की हत्या का आरोप है।

पूर्व जज प्रभाकर ग्वाल का आरोप है कि सरकार ने उन्हें षड्यंत्र करके इसलिए हटा दिया क्योंकि वे आदिवासियों को सही न्याय दे रहे थे। एक एसपी के शिकायत को आधार बनाकर उन्हें बर्खास्त करवा दिया गया। जेलर वर्षा डोंगरे ने भी जब ऐसे ही बात सोशल मीडिया पर लिखा तब भी सरकार ने उन्हें ससपेंड कर दिया। सामाजिक संगठनों ने जब आवाज उठाई तो उन्हें नक्सली समर्थक बता दिया। यही नहीं इन सबको प्रताड़ित भी किया गया, लेकिन सरकार ने इन आवाजों को सत्ता के ताक़त के दमपर कुचल दिया।

क्या कहा जवान ने

9 दिसंबर को CRPF कैम्प में आपसी फायरिंग में चार जवानों की मौत हो गयी उसके लिए संतराम नामक जवान को आरोपी माना गया और पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। उसने आरोपों से तो इनकार किया ही है साथ ही यह भी कहा है कि पुलिस और अर्द्धसैनिक बल जिस तरह से गरीब आदिवासियों को नक्सली बताकर मार देते हैं, मुखबिर बताकर गिरफ्तार कर लेते हैं इसी तरह इन्होंने मुझे भी फंस दिया है। यह जवान नक्सलियों के विरुद्ध अर्द्धसैनिक बलों के मुहिम का हिस्सा रह चुका है। उसने उन आरोपों की पुष्टि की है जिसे अबतक सरकार नकारती और दबाती रही है। पुलिस पर थाने में आदिवासी लड़कियों को नक्सली बताकर बलात्कार करने और फर्जी मुठभेड़ में मार डालने तक के आरोप लगते रहे हैं। ऐसे में क्या सरकार इसकी जांच कराएगी?

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