Tuesday, September 18, 2018
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विश्व आदिवासी दिवस को स्थानीय अवकाश घोषित किये जाने का शुरू हुआ विरोध ,पढिये ,क्या हैं विरोध का असली वजह ?

जशपुर मुनादी ।।

अखिल भारतीय जनजाति सुरक्षा मंच के जिला व वि ख के पदाधिकारियों ने मिलकर   अनुविभागीय अधिकारी राजस्व बगीचा के कार्यालय में पहुँच कर कलेक्टर के द्वारा 9 अगस्त को विश्व  आदिवासी दिवस  स्थानीय घोषित अवकाश को निरस्त करने की माँग को लेकर कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपे।

विरोध का असली वजह यह है —-

उक्त आवेदन में यह माँग किया गया है कि 9 अगस्त को जशपुर जिले में विश्व आदिवासी दिवस के नाम पर स्थानीय अवकाश घोषित किया गया है जो भारत के संविधान कि मंशा अनुरूप नहीँ है ज्ञात हो कि संयुक्त राष्ट संघ के द्वारा उक्त कि घोषणा ऐसे देशों में रह रहे मूल निवासियों के संदर्भ में किया गया है जहाँ बाहर के लोगों के द्वारा आकर वहाँ के मूल निवासियों को उनके मौलिक अधिकारों से वंचित कर दिया गया है  जैसे आस्ट्रेलिया कनाडा आदि किंतु भारत में रहने वाले सभी जाति वर्ग लोग यहाँ के  मूल निवासी ही है और भारत में कोई वर्ग कहीँ बाहर से आकर किसी भी वर्ग को उनके मूल अधिकारों से वंचित नहीँ किया गया है कारणवश राष्ट संघ के द्वारा घोषित उक्त आदेश भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में लागू नहीँ होता है ऐसी स्थति में उक्त तिथि को आदिवासी दिवस के नाम पर स्थानीय अवकाश घोषित करना भारत जैसे सहिष्णु देश में उचित नहीँ है ।

अखिल भारतीय जनजाति सुरक्षा मंच के द्वारा अखिल भारतीय कल्याण आश्रम के साथ सम्बद्ध होकर देश भर में रहने वाले वीभीन्य जनजाति समुदाय के हित में कार्य किया जा रहा है ।और देश हित में इस आदेश का विरोध करते हुए निवेदन करते है कि उक्त आदेश को वापस लेने कि कृपा करें

अखिल भारतीय जनजाति सुरक्षा मंच के जिला अध्यक्ष श्री नयूराम भगत उपाध्यक्ष श्री चन्द्रदेव यादव ब्लाक अध्यक्ष विनोद भगत उपाध्यक्ष देवलाल भगत सचिव धनुषधारी राम अनिल कुमार भगत राम जी भगत राजेश जायसवाल विनोद उरांव खुलन राम विजय राम सहित अनुविभागीय अधिकारी हितेष  कुमार बघेल  तहसीलदार मुखदेव प्रसाद यादव के समक्ष ज्ञापन सौंपते हुए मौखिक रुप भी आगे कि कार्यवाही हेतु निवेदन भी किया

One thought on “विश्व आदिवासी दिवस को स्थानीय अवकाश घोषित किये जाने का शुरू हुआ विरोध ,पढिये ,क्या हैं विरोध का असली वजह ?

  1. गलत इतिहास पढ़कर ऐसा हरकत करने वाले सच्ची इतिहास पढ़ें । 5000 सालों की दु:ख दर्द किसी से छुपा नहीं है।इसको जाने बगैर ऐसे ब्यानो से बचें तो बेहतर है ।

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