Tuesday, November 20, 2018
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हइकोर्ट ने किस कंपनी को कहा कि ज़मीन ली है तो नौकरी देनी होगी और 3 साल का ब्याज साथ में………..

जमीन के बदले प्रभावित किसान के इंजीनियर बेटे को 30 दिनों के अंदर परमानेंट नौकरी जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड को हइकोर्ट ने आदेश दिया है।
प्रभावित किसान ने हाईकोर्ट में तीन साल पहले दायर की थी याचिका, मंगलवार को आया कोर्ट का फैसल। उद्योग स्थापित करने के लिए किसान की जमीन लेने के बाद जिंदल स्टील एंड पॉवर लिमिटेड के द्वारा प्रभावित किसान के बेटे को अनुबंध की शर्तों के अनुसार नियमित नौकरी न देने को संविधान के अनुच्छेद 21 में दिए गए जीविकोपार्जन व जीने के अधिकार का उल्लंघन हाईकोर्ट ने माना है। कोर्ट ने किसान की याचिका पर सुनवाई के बाद आदेश दिया है कि जिंदल कंपनी याचिकाकर्ता को उसकी योग्यता बीई मैकेनिकल के अनुसार 30 दिन के अंदर नियमित नौकरी दें। यह नौकरी आदेश भू अधिग्रहण अधिकारी द्वारा पारित आदेश के अनुसार लागू होगा। याचिकाकर्ता को याचिका दायर की तिथि 13 अगस्त 2014 से नियमित कर्मचारी मानते हुए जिंदल उक्त अवधि से अब तक का वेतन साढ़े 7 प्रतिशत ब्याज के साथ दें। किरोड़ीमल नगर के ढोंग धकेल गांव के निवासी किसान रमाकांत पटेल की जमीन जिंदल स्टील व पावर लिमिटेड ने अपना उद्योग स्थापित करने के लिए थी। अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी करने के बाद 17 जुलाई 2008 काे भू अधिग्रहण अधिकारी एसडीएम ने जमीन के एवज में अवार्ड पारित किया जिसमें जमीन के एवज में भुगतान करने साथ ही यह शर्त शामिल थी कि प्रभावित परिवार के सदस्य को परमानेंट नौकरी दिया जाएगा। लेकिन जिंदल पावर की ओर से अधिग्रहण के अनुबंध में उल्लेखित इस शर्त का पालन नहीं किया गया। कंपनी की ओर से किसान के इंजीनियर बेटे वैभव राज पटेल को 21 मई 2014 को एक साल की अप्रेंटिसशिप के तौर पर 11 हजार रुपए प्रतिमाह देने का प्रस्ताव दिया। इसे अस्वीकार करने के बाद कंपनी ने वैभव को ट्रेनी के तौर पर 20 हजार रुपए प्रतिमाह देने का प्रस्ताव दिया।

जिंदल कंपनी द्वारा नौकरी न दिए जाने पर पीड़ित वैभव ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि उसके पिता अपनी जमीन देने को तैयार नहीं थे लेकिन नियमित नौकरी के वायदे पर उन्होंने अपनी जमीन दी। भू अधिग्रहण अधिकारी के समक्ष अनुबंध की शर्त तय हुई, उनमें यह भी शामिल था कि किसान के बेटे को नियमित नौकरी दी जाएगी। लेकिन इसका पालन कंपनी ने नहीं किया। कोर्ट ने इस तर्क से सहमत होकर याचिकाकर्ता को उसकी इंजीनियरिंग की योग्यता अनुसार 2014 से सर्विस व उस अवधि से वेतन और 7.30 प्रतिशत ब्याज देने का आदेश जिंदल कंपनी को दिया है।

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