Saturday, September 21, 2019
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गणित में महारत हासिल रखने वाले अफसर भी खा गए फेल, अब इस सचिव को अवमानना नोटिस, 2 सितम्बर को उपस्थित होने का ….

Munaadi News

जल संसाधन विभाग के इस सचिव को हाई कोर्ट के आदेश की अवमानना पर उपस्थित होने का आदेश, सचिव अविनाश चंपावत को पदोन्नत मामले में अवमानना का है मामला

बिलासपुर मुनादी।

जल संसाधन विभाग के सचिव अविनाश चम्पावत को कोर्ट के आदेश की अवमानना किये जाने पर 2 सितम्बर को हाई कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश जारी किया गया हैै। इनके विरुद्ध छ्त्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के जल संसाधन विभाग में बरमकेला ब्लॉक में पदस्थ एक सब इंजीनियर के मामले को लेकर अवमानना का सामना करना पड़ रहा है इन पर कोर्ट को गुमराह करने का मामला भी न्यायालय के समक्ष रखा है और न्यायालय ने इसे मानते हुए सेक्शन अधिकारी श्री त्रिपाठी को फटकार भी लगा चुकी है।

मंत्रालय में पदस्थ सेक्शन अफसर श्री त्रिपाठी के कारनामों ने आखिरकार सचिव अविनाश चंपावत को हाई कोर्ट में खड़ा होने को मजबूर कराया। पूरा मामला डिग्री धारी उप अभियंताओं को पदोन्नत नही कर डिप्लोमाधारी उप अभियंताओं को पदोन्नत दिया गया था।

ऐसे ही एक अन्य डिग्रीधारी उपअभियंता के एल नेताम के पदोन्नत प्रकरण के अवमानना मामले में विभाग ने नामी-गिरामी वकील खड़ा कर डर्टी ट्रिक्स द्वारा अवमानना को रद्द करवा लिया था लेकिन प्रदेश के जल संसाधन विभाग रायगढ़ जिले के बरमकेला में पदस्थ यू के श्रीवास्तव के प्रकरण मे यह चाल कामयाब नहीं हुई। उनके वकील राहुल तामस्कर द्वारा विभाग से हायर किये गए नामी वकील के विषय से हटकर उपलब्ध कराये गए जवाब एवं तर्कों का जोरदार विरोध करने के फलस्वरूप, कोर्ट ने अवमानना को सही ठहराया।


जैसा कि आम जनता में सिंचाई विभाग को लेकर नियमों में हेराफेरी कर ट्रांसफर पोस्टिंग, पदोन्नति में व्याप्त भ्रष्टाचार चरम सीमा में होने से इत्तेफ़ाक़ी राय क़ायम है और मंत्रालय में पद्स्थ कर्मचारियों को जरूरतमंद लोगों से पैसे वसूलने में महारत हासिल है। ऐसे ही अन्य वाकये में दलपत शर्मा, यू के श्रीवास्तव, के एल नेताम तथा कई ऐसे अन्य स्नातक उपअभियंता से सेक्शन ऑफिसर त्रिपाठी से लेन देन में वर्ष 2006 के बाद अनबन के कारण विगत 10-15 सालों से पदोन्नति रोक रखी है। विभागीय उच्च अधिकारियों का आलम यह है कि नियमो के जानकार होते हुए भी इस सेक्शन अफसर की हेराफेरी से बनाई गई नोटशीट को आंख मूंद कर आगे बढ़ाते हुए सचिव तक पहुंचा देते है फिर चाहे, वह हाई कोर्ट में जवाब देने जैसा संजीदा मामला ही क्यों न हो, श्री त्रिपाठी अनुभाग अधिकारी के आंकड़ो की हेराफेरी के कारनामो की वजह से लगभग 20 डिग्रीधारी उप अभियंताओं को पदोन्नति न होने का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है । छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद विगत 19 वर्षों में लगभग 1200 डिप्लोमाधारी उप अभियंता पदोन्नत हुए दूसरी तरफ मात्र 82 डिग्री धारी उप अभियंता ही पदोन्नत हुए, और वर्ष 2006 के बाद से किसी डिग्रीधारी उप अभियंता की पदोन्नति ही नहीं की गई। त्रिपाठी महोदय की नियमो में हेराफेरी की करतूतों के कारण प्रदेश के युवाओ को सीधी भर्ती का भी मौका नहीं मिल रहा तथा पैसे के दम पर मात्र और मात्र डिप्लोमा वर्ग को ही पदोन्नति दी जा रही है। विभाग में गणित के जानकर इंजीनियर होते हुए भी गणना की हेराफेरी में रोक लगाने की बजाय विभाग के अधिकारी त्रिपाठी के नाम की माला जपने में लगे रहते है। अधिकारियो की लापरवाही एवं पक्षपात के कारण, अभी भी इन 20 डिग्रीधारी उपअभियंताओं में से कई के प्रकरण हाई कोर्ट में यथा, 3060/2013, 1485/2014, 1623/2016 एवं 350/2019 पेंडिंग है। इनमें यू के श्रीवास्तव का पदोन्नति संबंधी आदेश 2010 में हाई कोर्ट ने जारी किया था,लेकिन त्रिपाठी एंड पार्टी की हठधर्मिता के कारण आदेश का पालन नहीं हुआ तथा श्रीवास्तव अपने हक़ की लड़ाई में फिर 2018 में कामयाब हुए जब हाई कोर्ट ने दुबारा फैसले को बरकरार रखा,लेकिन फिर वही त्रिपाठी एंड पार्टी की डर्टी ट्रिक्स एवं विभागीय अधिकारियों के त्रिपाठी के नाम की माला जपने की वजह से आदेश पालन नही हुआ एवं अवमानना प्रकरण लगाना पड़ा।
विभाग के अधिकारी येन केन प्रकार से इस सेक्शन ऑफिसर के कारनामो में साथ देकर 20 डिग्रीधारी उपअभियन्ताओं के पदोन्नति में अड़ंगा लगाने में सफल हो रहे है विभाग के पूर्ववर्ती सचिव सोनमणि वोरा से जब मिलकर इन 20 डिग्री धारी उप अभियंताओं ने दस्तावेजों के साथ बात की तब उनके द्वारा सच्चाई से वाकिफ होने के कारण इन 20 उप अभियंताओं के पदोन्नति की कार्यवाही करने की स्थिति में आ गए थे लेकिन उनके अध्ययन अवकाश में विदेश जाने की वजह से यह संभव नहीं हुआ,उनके उत्तरवर्ती सचिव श्री चंपावत के आने के बाद परिस्थितियां इस हठधर्मी, आंकड़ो की हेराफेरी के अभ्यस्त सेक्शन ऑफिसर के पक्ष में होती गई और अब इन्ही वजहों से एक सचिव को हाई कोर्ट में हाज़री लगाना पड़ रहा है। आगामी 26 अगस्त एवं 02 सितम्बर को इन्ही लोगों के 4 प्रकरण की फिर हाई कोर्ट में सुनवाई तय है अब देखना यह है कि विभाग के उच्चाधिकारी कब तक इस इस सेक्शन अधिकारी के नाम की पट्टी अपनी आँखों में बांधे रहते है।
बात 20 उपअभियंताओं की पदोन्नति तक ही सीमित नही है, ये एक शासन के उच्च पदों में बैठे ऐसे अधिकारियों के कार्यशैली की है जो सिर्फ पैसे कमाने के अलावा कुछ नही करना चाहते है ओर पैसे के दम पर न्यायालय की अवमानना करने से भी नही चूकते है , इन 20 उप अभियंताओं की लड़ाई भी सराहनीय है जो सच के दम पर इतने बड़े पदों पर बैठे अधिकारियों को न्यायालय के दरवाजे तक पहुचाने का कार्य कर रहे है । एक हठधर्मी कर्मचारी के कारण न्यायालय , एवम सचिव् स्तर के अधिकारी का समय खराब किया जा रहा है इस पर शासन को संज्ञान लेकर आवश्यक कार्यवाही करना चाहिए

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