Monday, December 10, 2018
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सरकार को चुनाव में शून्य पर लाने की तैयारी, सरकार से नाराज शिक्षाकर्मी चुनाव में धमाका की तैयारी में

 

छत्तीसगढ़ मुनादी ।।

 

जिस तरह शिक्षाकर्मियों को हड़ताल वापसी के बाद जलालत का सामना करना पड़ रहा है इससे वे काफी बिफरे हुए हैं। शिक्षाकर्मी चाहे किसी भी संघ का हो, हड़ताल के भागीदार राजे हों या नहीं लेकिन सब में गुस्सा समान है। सरकार के रवैये से वे शिक्षाकर्मी भी गुस्से में हैं जो सैद्धांतिक रूप से भाजपा समर्थक हैं। ऐसे में शिक्षाकर्मियों के नेतृत्व से लेकर सामान्य सदस्य तक सरकार को शून्य पर लाने कवायद तेज कर दिया है।

जिस तरह शिक्षाकर्मियों का आंदोलन शून्य मांगों पर वापस हो गया उससे लगता है आने वाले चुनावों में सरकार शून्य का परिणाम देने अब शिक्षाकर्मियों ने मां बन लिया है। यदि कुछ मांगे मानकर सरकार ने सहृदयता दिखाया होता तो इनके अंदर कुछ संतोष की भावना जरूर होती लेकिन बिना किसी मांगों को माने शिक्षा कर्मियों ने अपना हड़ताल वापस लिया है तो इसका मनोवैज्ञानिक मतलब निकल जा सकता है जो आने वाले दिनों में घातक परिणाम भी दे सकता है ।
 हड़ताल अंततः 16 दिन  में ही भहराकर ढह गई। सरकार ने भारी मात्रा में बर्खास्तगी उत्पीड़न गिरफ्तारी कर तानाशाही की याद दिला दी। राज्य में लग ही नहीं रहा था कि कहीं से प्रजातांत्रिक शासन है।  इसके अलावा अपने कार्यकर्ताओं के माध्यम से सोशल मीडिया में यह भ्रम फैलाया जा रहा था कि इससे सिर्फ बच्चों के भविष्य का नुकसान हुआ है। ऐसे में शिक्षा कर्मियों ने तो हड़ताल वापस ले लिया लेकिन यदि उनसे बात करें तो वे स्पष्ट बताते हैं कि सरकार ने उनके साथ बहुत गलत किया है। एक शिक्षाकर्मी ने तो यहां तक कहा कि गुस्से को अभी हम अपने अंदर दबा देंगे और चुनाव में इसी गुस्सा को जाहिर करेंगे।  तब न इनके पास सत्ता रहेगी न इनका सत्ता का अहम।

यह तो जोगी पार्ट टू है

इससे पहले मुख्यमंत्री को सॉफ्ट कार्नर वाला आदमी समझा जाता था। यह मान्यता ऐसी थी कि याद कीजिये झीरम कांड, सरकारी मशीनरी के फैल होने के बाद भी उस घटना  के लिए डॉ रमन सिंह को सीधा जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सका था। लेकिन अचानक क्या हुआ कि डॉ रमन सिंह को जोगी पार्ट टू कहा जाने लगा है। कुछ लोग यह भी आरोप लगा रहे हैं कि यह सब ब्यूरोक्रेसी के शह पर किया जा रहा है।

आरएसएस का सहयोग

कहा तो यहां तक जा रहा है कि सरकार से आरएसएस भी खफा है और शिक्षाकर्मियों को भड़काने में इनका भी सहयोग है। आरएसएस भी मुख्यमंत्री के तेवर  अचानक बदलने से हत्प्रभ है। अब उन्हें लग रहा है कि इस सरकार की दोबारा वापसी हुई तो यह और क्रूर हो जाएगी।

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