Wednesday, September 19, 2018
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नए साल में जश्न नहीं बेटी की मौत का मातम, न्याय के लिए भी दर दर भटक रहे परिजन

 

रायगढ़ मुनादी

दामाद ने पहले बेटी को प्रताड़ित किया, बाद में कोर्ट में झूठ बोलकर घर लाया, फिर ले आया दूसरी महिला घर में और इसके बाद फिर शुरू हुआ प्रताड़ना का दौर. अंततः एक दिन घर में आयी उसकी मौत की खबर. बेटी की मौत के बाद परिजनों ने थाने में गुहार लगायी लेकिन १५ दिन बीत गए अब तक न जांच हुयी न कार्रवाई. परिजनों का आवेदन लेने से भी पुलिस ने इंकार कर दिया. ऐसे में नए साल में जश्न मानाने की जगह पूरा परिवार न्याय के लिए दर-दर भटक रहा है.

कुनकुरी की रहनेवाली शबाना की शादी 2008 में लैलूंगा के मोमिन से हुयी थी. कुछ दिन तो ठीक चला लेकिन बाद में बच्चे को लेकर तानाकशी शुरू हुयी, फिर जब बच्चे हो गए तो पति और बच्चों के साथ उन्हें अलग कर दिया गया. फिर शुरू हुआ पति के प्रताड़ना का दौर. पति शराब पीकर
आता और लोहे के रॉड, लात घूंसे सबसे मार पीट करता.
अंततः वह अपने मायके चली गयी और घरेलु हिंसा का केस अपने पति मोमिन पर कर दी. पति ने कोर्ट में वादा किया की अब वह कभी अपनी पत्नी से मार पिट नहीं करेगा और उसे लेकर वापस लैलूंगा आ गया. लेकिन कुछ दिन के बाद फिर वही दौर लौट आया. प्रताड़ना की वजह थी एक लड़की जो इमरान की ज़िन्दगी में आ गयी थी. अंततः शबाना के पिता को १८ दिसंबर को एक फ़ोन आया और बताया गया की उनकी बेटी शबाना अब दुनिया में नहीं रही.

परिजनों के तथ्य

मृतक के परिजनों का कहना है की उसे ज़हर खिलाई गयी है क्यूंकि उसने जो ज़हर खाया है उसका उपयोग कृषि कीटनाशक के लिए होता है, जब मोमिन और उसके
परिजनों की कोई खेती ही नहीं होती तो वो कीटनाशक कैसे उनके घर में कैसे आया? आरोपी मोमिन ने जब कोर्ट में उसकी खैरियत की जिम्मेदारी ली थी फिर भी मारपीट क्यों करता था? मृतका ने दूसरी पत्नी के कारण जब विरोध में आवाज उठायी तो उस्बे शबाना को राष्ट्र से हटाने केलिए मोमिन ने उसे ज़हर दे दिया.

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