Tuesday, June 19, 2018
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साम्राज्य विलुप्त होने के बाद पहली बार डोम समाज के लोग आए एक मंच के नीचे ,कहा– इतिहास दोहराएंगे

 

शिवम बेहरा की मुनादी ।।

 

 

 

गत दिवस छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में डोम राजाओं के साम्राज्य के बाद पहली बार डोम समाज का बृहद सम्मेलन का आयोजन हुआ। जिले के कुनकुरी में आयोजित इस महासम्मेलन में छग उड़ीसा और झारखंड के सामाजिक प्रतिनिधियों ने बढ़चढ़कर हिस्सा लिया। । महासम्मेलन का मुख्य उद्देश्य समाज में संगठन , संरक्षण , शशक्तिकरण एवं समाज की चहमुखी विकास के लिय सदैव तत्पर रहकर समाज के उत्थान में जुटना है । इस महासम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ प्रान्त प्रचारक भैया जी प्रेम शंकर सिदार जी राष्ट्रिय स्वयं सेवक संघ रायपुर , विशिष्ट अतिथि में शम्भूनाथ चक्रवर्ती ,माटीकला बोर्ड छत्तीसगढ़ शासन के द्वारा अध्यक्ष जगरनाथ राम छत्तीसगढ़ प्रान्त अध्यक्ष , सुरेश चंद्र बाग छत्तीसगढ़ प्रान्त अध्यक्ष और जोधन राम झारखण्ड प्रान्त अध्यक्ष शामिल थे ।मुख्यआतिथि के रूप में कौशल बेहार समरसता छत्तीसगढ़ प्रमुख थे साथ में विजय शंकर पटनायक रायगढ़ विभाग मा. संचालक भी कार्यक्रम में मौजूद थे ।
कौशल बेहार ने अपने उद्बोधन में समाज को लेकर कहा कि समाज को संगठित होना एकजुटता का परिचय देता है । डोम समाज को अपनी संस्कृति को बचाये रखने के लिये पूरे समाज का एकजुट करना पड़ेगा । शम्भूनाथ चक्रवर्ती ने भी अपने भाषण में डोम समाज की पूर्वजों को स्मरण करते हुए डोम समाज की उत्पत्ति के बारे में विस्तार से बताया और कहा कि पहले जशपुर जिले में डोम राजा का साम्राज्य स्थापित था। और काशी में दो दो डोम राजाओ का साम्राज्य आज भी स्थापित है । सतयुग में भारत के प्रतापी सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र को विपत्ति के समय डोम राजा पहले वंशज लल्लू डोम ने उनके साम्राज्य को खरीद लिया था जिसके बाद एक महाराज को खरीदने के बाद से कल्लू डोम को भी महाराज की उपाधि दी गई ।

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