Monday, April 23, 2018
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डॉक्टर ने कहा इतने कम वेतन में नहीं होगी सर्जरी, वेतन बढ़ाओ हम काम बढ़ाएंगे

 

जशपुर मुनादी

हाल ही में महिला आयोग की अध्यक्ष को दो टूक जवाब देने और छुट्टी के बावजूद भी मरीजो की सेवा करने को लेकर सोशल मीडिया में जोर शोर से सुर्खियों में आये जिलाअस्पताल जशपुर के चिकित्सक डॉ अनामया बीडबई ने सर्जरी करने से मना कर दिया है ।छग शासन को लिखे एक पत्र में उन्होंने अपना मत साफ करते हुए साफ साफ लिख दिया है कि उनसे काम सर्जन का लिया जाता है और वेतन सामान्य चिकित्सको से भी कम दिया जाता है ऐसे में वह वही काम करेंगे जिसका उन्हें वेतन मिलता है । बुधवार की शाम को सोशल मीडिया में डॉ अनामया के द्वारा शासन को लिखे गए पत्र का खुलासा हुआ ।
आपको बता दें कि डॉ अनामया एमबीबीएस की डिग्री के साथ लन्दन के किसी मानिंद कॉलेज से सर्जन की डिग्री भी ली है और बीते कुछ वर्षों में उन्होंने जिला अस्पताल में कई ऐसे गम्भीर मरीजो की सर्जरी की है जिनका सर्जरी आस पास के इलाके में सम्भव नही है लेकिन बावजूद इसके शासन द्वारा उनके लिए अब तक सर्जन का मानदेय तय नही किया गया ।कुछ दिन पहले डॉ अनामया की कार्य कुशलता को इंगित करते हुए चंद्रपुर बिधायक युद्धवीर सिंह जूदेव ने अपने ही सरकार को पत्र लिखकर ऐसे योग्य चिकित्सको का वेतन बढाये जाने की वकालत की थी ।
जिला अस्पताल के इस डॉ द्वारा छग शासन को लिखे गए पत्र का जब सोशल मीडिया में खुलाशा हुआ तो एकबारगी हड़कम्प मच गया और लोग खुलकर सरकार की चिकित्सा व्यवस्था के खिलाफ आग उगलने लगे ।शासन द्वारा जशपुर को दी गई मीडिकल सुविधा से लोग पहले से ही नाराज हैं ।लोगो का आरोप है सरकार ने इस जिले को अबतक मेडिकल के नाम पर कुछ नही दिया और जो दिया है वह व्यवस्था भगवान भरोसे है ।

युवा पत्रकार तनवीर आलम ने सोशल मीडिया में किया खुलाशा ,पढिये,क्या लिखा है ?

सरकारी ढिंढोरा का सच एक डॉक्टर ने खोल दिया

ज़िला अस्पताल जशपुर में पदस्थ सर्जन डॉक्टर अनामय कमलाकर विदवई वर्तमान में जशपुर की डूब चुकी स्वास्थ्य व्यवस्था में घनघोर अंधेरे में रोशनी की तरह हैं.. उन्होंने mbbs की डिग्री के साथ ही लंदन से सर्जन की उपाधि ली है, लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार उनसे काम सर्जन का ले रही है और वेतन सामान्य चिकित्सा अधिकारी का दे रही है जो की सर्जन के वेतन से कम होता है.. उन्होंने मिन्नतें करने के बाद सरकार के रवैए से हारकर सर्जरी करने से और ऑन काल ड्यूटी करने मना करते हुए अस्पताल प्रबंधन, ज़िला प्रशासन और स्वास्थ संचालक को पत्र लिख दिया है.. वे अब सर्जरी नहीं करेंगे…
और सरकार ढिंढोरा पिटती है कि हमें डॉक्टर नहीं मिल रहे हैं।”
बहरहाल, डॉ अनामया के इस कदम के बाद सरकार का अगला कदम क्या होता है यह तो आने वाला वक़्त ही बताएगा लेकिन पिछले एक पखवाड़े से लगातार चल रहे इस मुद्दे को लेकर विपक्षी पार्टियां भी अब सियासत साधने की जुगत में लग गयी हैं ।

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