Wednesday, September 19, 2018
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कांग्रेस का शहीद जवानों की श्रद्धांजलि के साथ सरकार को फटकार, नक्सल मोर्चे पर गिनाई नाकामी

 

रायपुर मुनादी ।।

 

 

कांग्रेस ने सुकमा हमले में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि शहीद परिवारजनों के दुख में हम सब की सहभागिता है।कांग्रेस उनके दुख को बखूबी समझती है, उनके दर्द को महसूस करती है क्योंकि माओवादी हमले में कांग्रेस ने भी अपनों को खोया है।

कांग्रेस ने बढ़ते माओवादी हिंसा के लिये नेतृत्व में इच्छाशक्ति के अभाव, सूचना तंत्र की विफलता और सुरक्षा बलो के पास उचित संसाधनों का अभाव को प्रमुख कारण बताया है। सीआरपीएफ ने 2005 से अब तक 1928 जवान हिंसा में मारे गये हैं जिनमें आधे से अधिक छत्तीसगढ़ में मारे गये है। 2003 में माओवादी दक्षिण बस्तर के सीमावर्ती इलाकों तक सीमित था। वह भाजपा के 14 वर्षो के शासनकाल के बाद 14 जिलों तक कैसे बढ़ा? रमन सिंह सरकार के 14 वर्षो में छत्तीसगढ़ में माओवादी हिंसा प्रभावित इलाका 3 ब्लाकों से बढ़कर देश में सबसे ज्यादा माओवादी हिंसा से प्रभावित इलाका कैसे बन गया है? एसपी वी.के. चैबे के मारे जाने की घटना की जांच तक नहीं होती और जो अधिकारी पूरी घटना में कहीं शामिल नहीं होता है, उस अधिकारी को वीरता पुरस्कार दिया जाता है। दिल्ली और अमेरिका जाकर मुख्यमंत्री रमन सिंह ये दावा जरूर करते है कि माओवादी बीते दिनों की बात है। लेकिन बड़ी घटनाओं की भी जांच नहीं कराते। 2018 में अब तक चार हमले हो चुके है, 17 जवान मारे जा चुके है।

नक्सलियों से मिलीभगत का आरोप

2013 में डाॅ. रमन सिंह विकास यात्रा में निकलते है और नक्सली क्षेत्रों से यात्रा कर सुरक्षित वापस लौट आते है वहीं कांग्रेस के परिवर्तन यात्रा में नक्सली घात लगाकर हमला करते है जिसमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की हत्या होती है। सुकमा जिले में 11 मार्च को मुख्यमंत्री लोकसुराज अभियान कार्यक्रम के दौरान मोटर सायकल में निकलते है, सुरक्षित वापस लौट आते है उनके वापस लौटने के ठीक तीन दिन बाद एंटीलैंडमाइन व्हिकल में निकले सीआरपीएफ जवानों पर नक्सली हमला करते है जिसमें 9 जवान शहीद हो जाते है।

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