Tuesday, December 11, 2018
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जशपुर की सियासत में “छोटे सरकार” की वापसी ! “सरकार”को लेकर सोशल मीडिया में शुरू हुई सियासत….

रायपुर मुनादी——-

 

जशपुर की सियासत में जशपुर रियासत के “छोटे सरकार” युद्धवीर की वापसी को लेकर इनके समर्थकों ने सोशल मीडिया पर अभियान छेड़ दिया है। युद्धवीर के जशपुर वापसी को लेकर फेसबुक में चलाए जा रहे पोस्ट में लिखा जा रहा है कि भाजपा के दिवगंत नेता स्व दिलीप सिंह जूदेव के चले जाने के बाद से भारतीय जनता पार्टी जशपुर में मजबूत नेतृत्व की आवश्यकता है और इसकी भरपाई केवल युद्धवीर कर सकते है —–

पढिये ,क्या चल रहा है सोशल मीडिया में —–


“जशपुर की जनता की यही पुकार,
हुजूर युध्दवीर सिंह जूदेव जी को सौंपो जशपुर की कमान।
वर्तमान जशपुर के हालात और समय की मांग हैं छोटू बाबा।
आज से 30-35 वर्ष तक के पूर्व के चुनाव में आमजनों में यह चर्चा रहती थी कि “फूल छाप ही जितही” लेकिन 2018 के परिदृश्य कुछ और बयां कर रही हैं। 2013 के विधानसभा चुनाव में आदरणीय स्व• कुमार साहब की श्रद्धांजलि स्वरूप सहानुभूति चुनाव में हमें मिली किन्तु 2013-18 तक स्व• कुमार साहब के नीति, सिद्धान्तों की अनदेखी को कहीं न कहीं जनता ने आड़े हाथों लिया और अब 2018 के विधानसभा चुनाव में जहां आज से पूर्व कुनकुरी(तपकरा), जशपुर विधानसभा सीट में भाजपा की जीत तय मानी जाती थी आज उन्हीं सीट से पार्टी के नेता जीत का दावा करने से कतरा रहे हैं। आमजनों में चर्चा है कि “जे भी जितही 2-4 हजार से ज्यादा व्होट से नि जीते!”
ऐसे में समय और हालातों को देखते हुए जशपुर के लोग महानदी के तट पर बसे जशपुर माटीपुत्र कुंवर युध्दवीर सिंह जूदेव जी को जशपुर की कमान थामने की मांग कर रहे हैं।”

आपको बता दें कि 2008 के विधानसभा चुनाव में चन्द्रपुर से चुनाव जीतने के बाद युद्धवीर ने जशपुर की राजनीति से लगभग किनारा कर लिया है और पूरी तरह से अपने विधानसभा क्षेत्र चन्द्रपुर में डटे रहे ।लेकिन इन 10 वर्षों में जिले की राजनीतिक समीकरणों में काफी उतार चढ़ाव देखे गए । 2013 विधानसभा के चुनाव के बाद हुए जिले के नगरी निकाय और पंचायत चुनाव में भाजपा का ग्राफ तेजी से गिरा। जशपुर शहर में कांग्रेस ने पालिका चुनाव में परचम लहरा दिया तो पंचायत चुनाव में भी पार्टी को हर जगह नुकसान हुआ। 2018 के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा अभी तक मजबूत स्थिति में नही दिख रही है। जीत का इतिहास रचने वाली भाजपा इस चुनाव में जीत का दावा तक नही कर पा रही है । पत्थलगांव के अलावे जशपुर और कुनकुरी सीट भी इस पर दाँव पर लगी हुई बतायी जा रही है ।जनीनी सर्वेक्षणों में जिले के सभी 3 सीट पर पार्टी की स्थिति पहले से बहुत बद्दतर बतायी जा रही है । खुद भाजपा के नेता दबी जुबान से जीत का अनुमान तो लगा रहे हैं लेकिन 29 हजार और 34 हजार से जशपुर और कुनकुरी सीट पर जीत का परचम लहरा चुकी भाजपा इस बार हजार पांच सौ से ही जीतने का अनुमान लगा रही है । बीते 5 वर्षों में आयी इन राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए जशपुर रियायत के छोटे सरकार याने यूद्धवीर सिंह जूदेव को जशपुर की राजनीतिक नेतृत्व सौंपे जाने की मांग अभी से ही उठने लगी है।

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