Thursday, January 18, 2018
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चैम्बर चुनाव के नतीजे तय करेंगे विधानसभा चुनाव में व्यापारीयो का रुख, किसके लिए खुलेगा चैम्बर का ताला? परेशानी देने वालों को चुनेंगे व्यापारी ?

छत्तीसगढ़ मुनादी ।।

 

आनेवाले 18 दिसंबर को छत्तीसगढ़ चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज का चुनाव होने वाला है। मानना यह है कि इस चुनाव में किसी पैनल की जीत यह तय कर देगी कि विधानसभा चुनाव में व्यापारियों का रुख क्या होगा। वे सत्ता के साथ खड़े रहेंगे या विरोध में जाएंगे। नोटबन्दी और जीएसटी का बदला लेंगे या सबकुछ मुस्कुराकर सह लेंगे।

 छत्तीसगढ़ में छत्तीसगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज जो व्यापारियों का संगठन है उसका चुनाव होने वाला है। हालांकि यह संगठन भाजपा का व्यापारियों का एक अनुषांगिक संगठन कहा जाता है लेकिन अब इसमें दूसरे दलों की भी पैठ हो गई है। इनके सांगठनिक चुनाव में उस दल के लोग भी हाथ आजमा रहे हैं जिन्हें आनेवाले चुनाव में व्यपारियों के साथ कि उम्मीद है। यह चुनाव अब तय करेगी कि विधान सभा चुनाव में व्यापारी किसके साथ रहेंगे।

कहने को इस चुनाव में तीन पैनल चुनाव लड़ रहे है।
 तीनों का नाम व्यापारी विकास और प्रगति और एकता के नाम पर ही है लेकिन तीनों पैनल की अलग अलग राजनीतिक निष्ठा बतायी जाती है। कहा यह भी जा रहा है कि सत्ताधारी दल में निष्ठा रखनेवाले पैनल को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि सरकारी नीतियों से व्यापारी सबसे ज्यादा परेशान है। व्यापारियों के निशाने पर जो पैनल बताया जा रहा है उसके दो पदाधिकारी निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं। कहा जाता है कि भाजपा ने इसे प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया है और इस चुनाव में उसी पैनल को जिताने जी तोड़ कोशिश कर रही है जिसके सर्वेसर्वा भाजपा नेता श्रीचंद सुंदरानी हैं। सुंदरानी भाजपा नेता तो हैं ही साथ में व्यापारियों में इनकी मजबूत पकड़ है। लेकिन जब मुनादी ने कुछ व्यापारियों से बात की तो वे इस पैनल के  विरुद्ध दिखे। उनका कहना था कि जिन लोगों के कारण व्यापारियों को इतनी तकलीफें झेलनी पड़ रही है उन्हें कैसे फिर से चुन लें? पर उनके पास भी विकल्प का अभाव है। दूसरे पैनल के लोग भी लगभग उसी राजनीतिक निष्ठा के लोग हैं हालांकि पैनल और पार्टी अलग है। लेकिन व्यापारियों का कहना है कि यदि हमें इनकी नीतियों से परेशानी है तो हमें अपना गुस्सा दिखाने का यही मौका है। जो पैनल सत्ता के करीबियों का नहीं होगा हैम उन्हें चुनें।  हालांकि चुनाव 18 दिसंबर को चुनाव है लेकिन जोड़ तोड़ शुरू हो चुका है। लेकिन इतना तय है कि यह चुनाव विधानसभा चुनाव में व्यपारियों का रुख जरूर तय करेगा कि वे किसके पक्ष में जाएंगे।

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