Monday, January 21, 2019
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बीपीसीएल के महेंद्र सिंह पेट्रोल पंप की एनओसी मामला को बना दिया है इतना पेचीदा की अधिकारी भी काटते हैं कन्नी

रायगढ़ मुनादी।
जिले के धरमजयगढ़ स्तिथ बीपीसीएल के महेंद्र सिंह कोमल पेट्रोल पंप के एनओसी मामले को संचालक द्वारा इतना पेचीदा बना दिया गया है कि अधिकारी भी इसमें गोल गोल घूम जाते है और इसमें हाथ डालने से कतराते है। पेट्रोल पंप स्थापना 2004-05 से लेकर अब तक इस मामले में लगातार शिकायत के बाद भी भाजपा सरकार के दौरान कार्रवाई नही हुई अब इस मामले में कांग्रेस सरकार में करवाई की उम्मीद की जा रही है लेकिन यहां भी एक तरफ कांग्रेस का दामन थाम रखे हैं, लेकिन अब महेंद्र सिंह कोमल के बीपीसीएल पेट्रोल पंप की जांच के लिए केंद्रीय सतर्कता आयोग नई दिल्ली द्वारा 21.12.2018 को जांच के आदेश दिया गया है।

दर असल मामला उस एनओसी से और भी पेचीदा हो गया जब पेट्रोल पम्प के जमीन को लेकर 5.10.2103 को तत्कालीन कलेक्टर के द्वारा एनओसी को निरस्त कर दिया था, लेकिन महज 10 दिनों के अंदर ही 15.10.13 को तत्कालीन अपर कलेक्टर ने जिला दंडाधिकारी के आदेश के विरूद्ध एनओसी पर स्थगन आदेश दिया। इस मामले में लगातार रसूख का इस्तेमाल किया जाता रहा और 15 साल के भाजपा शासन में नियम विरूद्ध पेट्रोल पंप संचालित होता रहा। प्रधान मंत्री कार्यालय को शिकायत के बाद आन लाइन लायसेंस निरस्त करना बताया गया और 4.1.2016 को दूसरा लायसेंस सम्बन्धित भूखण्ड 775/1 क और 1 ख के लिए इशु किया गया। यह लायसेंस आगरा विस्फोटक कार्यालय द्वारा जिला दण्डाधिकारी के 30.12.2015 के एनओसी के आधार पर जारी किया गया है। जिस आदेश को एनओसी बताकर लायसेंस लिया गया है दरअसल वह साइट प्लान संशोधित किये जाने का है। जिसके सम्बन्ध में टेरेटरी मैनेजर रायपुर के द्वारा अपने एनओसी 13.1.14 को एडीएम रायगढ़ द्वारा प्राप्त किया जाना प्रधान मंत्री के पीजी पोर्टल में जवाब दिया गया है।
जबकि साल 2013 में कलेक्टर द्वारा एनओसी रदद् किये जाने के बाद दूसरी एनओसी के लिए इससे ऊपर उच्च अधिकारी के यहां 60 दिवस के अंदर अपील करना होता है तभी एनओसी प्राप्त किया जा सकता है, लेकिन अब तक इस मामले में बीपीसीएल धरमजयगढ़ के महेंद्र सिंह कोमल के पेट्रोल पम्प के लिए आज पर्यंत तक उच्च अधिकारी के यहां अपील नही किया गया है।
ऐसी स्तिथि में जिला दण्डाधिकारी द्वारा अनापत्ति प्रमाण पत्र 30.12.2015 एवं एडीएम द्वारा प्रदत्त अनापत्ति प्रमाण पत्र 13.1.2014 जांच का विषय है। 8.10.2018 के 32 माह पहले दूसरा विस्फोटक लायसेंस 4.1.2016 को जारी कर दिया जाना सन्देह को जन्म देता हूं और यही जांच का भी विषय है। फिलहाल केंद्रीय सतर्कता आयोग द्वारा इस मामले में जांच के तो आदेश दिए हैं।

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