Tuesday, January 16, 2018
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कांग्रेस से नहीं, लड़ाई प्रशासन से, भाजपा कार्यकर्त्ता यहाँ क्यों हैं परेशान, पढ़िए

जशपुर मुनादी

 

खबर है कि आजकल जशपुत जिले में सत्ताधारी दल भाजपा और जिला प्रशासन की बीच अंदर ही अंदर जमकर ठनी हुई है । सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधियो की यहां एक नही सुनी जा रही है और ये आम लोगों की तरह मामूली मामूलो कामो के लिए अधिकारियों का चक्कर काट रहे हैं बावजूद इसके इनका काम नही हो रहा है । मजे की बात ये की जब ये अपना दुखड़ा लेकर अपने आला नेताओं के पास जा रहे हैं तो वहां भी उन्हें निराशा ही हाथ लग रही है ।वहां भी उन्हें सधा सा जवाब मिलता है ‘हम क्या करें ”
दरअसल यह सब कुछ आज से नही साल 2 सालों से चल रहा है ।अचिकारी ओर जनप्रतिनिधिओं की बन नही रही ,उनके नेता उनकी सून नही रहे ..ऐसे में अधिकारियों से असंतुष्ट कई नेता सोशल मीडिया में अपनी भड़ास निकाल रहे हैं । कई बार ऐसा देखा गया है कि पार्टी से जुड़े जनप्रतिनिधि जिला प्रशासन के इस अकडू रवैये को लेकर फेसबुक या व्हाट्सअप्प में अपना गुस्सा निकालते हैं । कई बार फेसबुक में लिखे अस्तुनष्ट नेताओं के स्टेटस पर मीडिया में भी काफी हो हल्ला हुआ । इनके बीच चल रहे मनमुटाव का असली कारण क्या है यह फिलहाल इसका अनुसंधान खुद पार्टी के ही लोग ही कर रहे है ।अनुसंधान में जो भी निकले लेकिन इतना तो तय है कि पार्टी कार्यकर्ता जिला प्रशासन से ज्यादा अपनी पार्टी से नाराज है । बीते माह प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री के दौरे के दौरान पार्टी कार्यकर्ता अपने ही पार्टी के खिलाफ मंत्री मूणत को आवेदन देने पहुच गए थे । पार्टी से जुड़े कार्यकर्ताओं का कहना है कि ग्रामीण अंचलों में ग्रामीण अपने नेताओं पर भरोसा करके छोटे छोटे काम लेकर उनके पास आते है और जब वे उनकी समस्या लेकर किसी अचिकारी के पास पैरवी करने जाते हैं तो अधिकारी इनकी बातों को तव्वजोह नही देते ऐसे में मतदाता निराश हो रहे है और उनकी निराशा आगामी समय के लिए पार्टी के लिए घातक हो सकती है ।
पाठको को ज्ञात होगा कि अभी कुछ दिनों से कुमार दिलीप सिंह जूदेव की प्रतिमा को लेकर काफी खींच तान चल रही है । जशपुर भाजपा के आदर्श, और छग में भाजपा को सरकार की सौगात देने वाले भाजपा के दिवगंत नेता कुमार दिलीप सिंह जूदेव की प्रतिमा लगाने में पसीने छूट जा रहे हैं । जिसके दम पर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी उसी सख्शियत की प्रतिमा लगाने के लिए प्रशासन इनके सामने 200 कानून बघार रहा है ।
दो सालों में जनता के बीच विश्वास खोते रहने के क्रम में भाजपा के लोग चुनाव के आखिरी साल में कौन सा बीच का रास्ता निकालते हैं यह तो आने वाला समय ही बताएगा लेकिन अगर ऐसा ही चलता रहा आने वाले समय

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