Tuesday, February 20, 2018
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अघोरेश्वर वाणी: महिलाओं की अद्वितीयता का उद्घोष

 

डॉ राजू पांडेय के आध्यात्मिक विचारों की मुनादी

 

 

किसी युग प्रवर्तक संत का चिंतन अपने समय से बहुत आगे होता है और जैसे जैसे वर्ष बीतते हैं इसकी प्रासंगिकता और महत्व में वृद्धि होती है। परम पूज्य अघोरेश्वर भगवान राम का सामाजिक दर्शन न केवल भारतीय समाज में व्याप्त जड़ता,अंधविश्वास और कुरीतियों पर प्रहार करता है अपितु हमें इन पर विजय प्राप्त कर स्वयं को सशक्त बनाने का मार्ग भी बताता है। यह आलेख मातृ शक्ति पर पूज्य अघोरेश्वर के अत्यंत महत्वपूर्ण विचारों का सार संक्षेप प्रस्तुत करने का एक लघु प्रयास है। परमपूज्य अघोरेश्वर ने नारियों को उनकी शक्ति और महत्ता का बोध जितने सशक्त रूप से कराया है वह पठनीय,मननीय और अनुकरणीय है। वे कहते है- आप लोग सदैव कुछ न कुछ देती रहती हैं और पुरुष सदा आपसे याचकों की भांति कुछ न कुछ माँगता रहता है। ——आप उदार हैं। आप अपनी दाता की शक्ति को पहचानें, समझें। ——-यह कहना सही है कि महिलाएं पुरुषों से अधिक पौरुष रखती हैं। पुरुष में जो पौरुष है वह स्त्री की ही देन है। जब पुरुष किसी कारणवश असमर्थ हो जाता है तब स्त्री किसी तरह का परिश्रम कर अपने परिवार का भी पालन पोषण कर लेती है।——–भारतीय समाज में नारियों का उच्च स्थान है। ऐसा किसी अन्य देश के समाज में नहीं है।——-हमारी संस्कृति की रक्षा में भारतीय नारियों का बड़ा ही महत्वपूर्ण योगदान है। इस देश के पुरुष वर्ग तो इसे सिर्फ चर्चा का विषय बना कर रखते हैं। हम बचपन से देखते आए हैं कि हमें शिष्ट बनाने में नारियों का बड़ा ही योगदान रहा है। साधु संतों, फकीरों ने गाँव गाँव में परिभ्रमण कर जिस संस्कृति का उद्घोष किया उसे नारियों ने संजो कर रखा। अन्यथा आज भारतीय संस्कृति का लोप हो गया होता। ——–नारियाँ दुर्गा की तरह सिंहनाद और गर्जना कर सकती हैं। जिससे धरती कंपित हो उठेगी, दिशाएं दिग दिग करने लगेंगी।—–यदि आप अपनी उचित बातों को मनवाने के लिए अपने उग्र रूप का प्रयोग करें तो उन्हें मनवा सकती हैं। आपके मधुर कंठ में सरस्वती का भी वास है। आपके मधुर स्वर और वाक्य मंत्र के समान हैं।——नारी का अर्थ इस प्रकार भी तो कर सकते हैं- न + अरि। आप महिलाएं न्यायमूर्ति हैं। आप न्याय करती रहें। परम पूज्य अघोरेश्वर नारियों का आह्वान करते हैं – आपको निर्भीक होना चाहिए क्योंकि आपकी निर्भीकता समाज का कल्याण कर सकती है। आप संकुचित रहेंगी, भयभीत रहेंगी तो हमारे समाज पर कलंक बना रहेगा। आप में देवी का जो प्रचंड स्वरूप है उसमें प्रतिविम्बित रहें। सभी पुरुष मात्र की जन्मदात्री नारी ही है।(30 अप्रैल 1977, सर्वेश्वरी टाइम्स)

परम पूज्य अघोरेश्वर एक अन्य स्थान पर हमें स्मरण दिलाते हैं- हमारे देश में देवताओं से देवियों को बड़ा माना गया है। जब देवता असुरों से पराजित हो जाते थे तब देवियों की आराधना पूजा कर पुनः शक्ति सम्पन्न हो विजयी होते थे।(28 जनवरी 1979 प्रयाग, इलाहबाद, उत्तरप्रदेश) कहा भी गया है-  यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः।

किन्तु आज हमारे देश में नारियों की स्थिति दुर्भाग्यवश अच्छी नहीं है।ग्रामीण महिलाओं की दुर्दशा का चित्रण करते हुए परम पूज्य अघोरेश्वर कहते हैं-” पुरुष अपना अधिकांश समय ताश खेलने नशा पीने पिलाने में गुजारते हैं जबकि महिलाएं दिन रात बच्चों की सेवा सुश्रुषा कर, उपले पाथ कर या किसी तरह से जलावन आदि की व्यवस्था कर पुरुषों के लिए भोजन तैयार कर उनकी बाट जोहती रहती हैं। इतने अधिक श्रम, उपेक्षा, प्रताड़ना इत्यादि के कारण स्त्रियों का स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता और वे प्रायः असमय ही मृत्यु का ग्रास बन जाती हैं।”(28 जनवरी 1979 प्रयाग, इलाहबाद, उत्तरप्रदेश)

 ईंधन की व्यवस्था में महिलाओं को होने वाली परेशानी से मुक्ति दिलाने का विचार आज का उज्ज्वला अभियान है जिसके बीज अघोरेश्वर महाप्रभु की अमूल्य शिक्षा में उपस्थित हैं।

हमारी नई पीढ़ी भी मातृ शक्ति की दुर्दशा के लिए उत्तरदायी है। नई पीढ़ी का नारियों के प्रति दुर्व्यवहार न केवल उन्हें  कष्ट पहुंचाता है बल्कि इन नवयुवकों को भी पतन के गर्त में डाल देता है। परम पूज्य अघोरेश्वर हमें बताते हैं- आज के नवयुवक शिक्षा प्राप्त करते हैं किंतु नारियों के प्रति बुरा भाव रखते हैं,निंदनीय व्यवहार करते हैं। परिणामतः उनकी बुद्धि,उनका विवेक नष्ट हो जाता है जिसके दुःखद परिणाम होने लगते हैं। वे अव्यवस्थित हो जाते हैं और उनका जीवन कुंठा और क्षोभ से भर जाता है।(28 जनवरी 1979 प्रयाग, इलाहबाद, उत्तरप्रदेश)

आज स्वच्छ भारत अभियान देश की प्राथमिकताओं में से एक है। इस स्वच्छ भारत अभियान का एक महत्वपूर्ण भाग है – शौचालयों का निर्माण। खुले में शौच की प्रथा पर 28 जनवरी 1979 को श्री सर्वेश्वरी समूह महिला सम्मेलन प्रयाग, इलाहबाद, उत्तरप्रदेश को संबोधित करते हुए पूज्य अघोरेश्वर ने जो विचार व्यक्त किए थे ऐसा प्रतीत होता है कि आज के स्वच्छता अभियान की बुनियाद इन विचारों पर ही आधारित है। पूज्य अघोरेश्वर कहते हैं –  “देश को स्वतंत्र हुए 32 वर्ष हो चुके फिर भी अभी भी जब रास्तों और सड़कों से गुजरते हैं तो आंखों को मूंद लेना पड़ता है क्योंकि स्त्रियाँ इन सड़कों के किनारे नित्य क्रिया करती हैं। लोग गुजरते रहते हैं, गाड़ियाँ आती जाती रहती हैं जिन्हें देखकर ये स्त्रियाँ संकोचवश उठ जाती हैं और इनके चले जाने के बाद फिर बैठ जाती हैं। नित्य क्रिया के समय उनके उठने बैठने का यह क्रम चलता रहता है जिसका उनके स्वास्थ्य पर बड़ा ही कुप्रभाव पड़ता है। अभी तक हम लोगों ने ग्रामों में शौचालयों के लिए न तो सरकार से माँग की है न ही इसके लिए संघर्ष किया है, हालांकि हमारे ग्रामीण अंचलों से कर के रूप में सरकार को अथाह धन राशि प्राप्त होती है। हमें सरकार को ग्रामीण शौचालयों की उपादेयता समझानी होगी।”

परमपूज्य अघोरेश्वर ने हमारे समाज में व्याप्त तिलक दहेज की प्रथा पर करारा प्रहार किया और इसके उन्मूलन के लिए वैचारिक और सांगठनिक स्तर पर व्यापक प्रयास किए। स्वयं द्वारा स्थापित श्री सर्वेश्वरी समूह के माध्यम से उन्होंने आडंबर रहित विवाह को प्रोत्साहन दिया। स्त्री शिक्षा के लिए परम पूज्य अघोरेश्वर ने अनेक बालिका विद्यालयों की स्थापना की। अघोरेश्वर महाप्रभु विधवा विवाह के समर्थक थे एवं उन्होंने भारतीय समाज को इस विषय में प्रेरित करने के लिए अपने प्रवचनों के माध्यम से अति महत्वपूर्ण योगदान दिया।

औघड़ संत परम पूज्य प्रियदर्शी राम जी के प्रेरणादायी मार्गदर्शन में अघोर गुरूपीठ बनोरा एवं उसकी शाखाएं नारी सशक्तिकरण के लिए निरंतर उल्लेखनीय कार्य कर रही हैं और अघोरेश्वर महाप्रभु के विचारों को रूपाकार दे रही हैं।  अघोरेश्वर भगवान राम विद्यामंदिर का शुभारंभ 1994 में रायगढ़ जिले के ग्राम बनोरा में तथा 2003 में जशपुर जिले के ग्राम मनोरा में हुआ और आज इन विद्यालयों में 827 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। ग्रामीण अंचल में निर्धन विद्यार्थियों और कन्या शिक्षा पर विशेष ध्यान केंद्रित करने वाले ये विद्यालय आधुनिक शिक्षा संसाधनों और तकनीक के प्रयोग द्वारा उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा देने और विद्यार्थियों में मानवीय,धार्मिक तथा आध्यात्मिक मूल्यों की स्थापना हेतु जाने जाते हैं। इनका शानदार परीक्षा परिणाम इनकी सफलता की कहानी आप कहता है। अवधूत शिल्पकला प्रशिक्षण केंद्र नारी सशक्तिकरण के लिए निरंतर प्रयासरत है और सन 2012 से मार्च 2017 तक इसमें 105 महिलाएं प्रशिक्षित हो स्वावलम्बन पथ पर अग्रसर हो चुकी हैं। दहेज जैसी सामाजिक कुरीति के उन्मूलन के पूज्य अघोरेश्वर के आदर्श को साकार करते हुए 20 तिलक दहेज रहित विवाह सम्पन्न कराए गए हैं। स्वच्छ भारत अभियान और खुले में शौच मुक्त ग्रामों के निर्माण का प्रयास तो शासन ने अभी प्रारम्भ किया किन्तु ग्राम बनोरा में निर्धन परिवारों हेतु 70 पक्के शौचालय बनाकर उन्हें वितरित करते हुए अघोर गुरूपीठ इस दिशा में पहले ही कदम बढ़ा चुकी है।

परम पूज्य अघोरेश्वर ने बारंबार पुरुषों से आह्वान किया कि वे नारियों के प्रति अपनी मानसिकता में परिवर्तन लाएं। 28 जनवरी 1979 को श्री सर्वेश्वरी समूह महिला सम्मेलन को प्रयाग इलाहाबाद में संबोधित करते हुए उन्होंने आह्वान किया- आप निश्चय कर लें कि महिलाओं के कष्ट निवारण हेतु सब कष्ट उठाएंगे, चिंतन और मनन करेंगे और कर्मशील होंगे।

परम पूज्य अघोरेश्वर नारियों को देश की दशा और दिशा तय करने में सक्षम मानते थे। उन्होंने 4 नवंबर 1979 को श्री सर्वेश्वरी महिला समूह रायबरेली को संबोधित करते हुए कहा- —-यदि आप सच्चे हृदय से संकल्प करेंगी तो अवश्य ही सफल होंगी। आप में जो भाव हैं वे पुरुषों में नहीं हैं। आप अपनी चेष्टा से देश के वातावरण में व्याप्त ईर्ष्या द्वेष, घृणा पर कुठाराघात कर सकती हैं। आशा है आप अपनी शक्ति से देश का नेतृत्व करने को तैयार होंगी।

परम पूज्य अघोरेश्वर ने स्त्रियों और पुरुषों दोनों से सदैव आह्वान किया कि वे स्वधर्म का पालन करें तो परिवार,समाज, राष्ट्र और विश्व का कल्याण हो सकता है। स्वधर्म का बोध आध्यात्मिकता के प्रति अभिरुचि जाग्रत होने पर ही हो सकता है इसका पालन करने की शक्ति गुरु-परमात्मा में दृढ़ विश्वास से ही मिल सकती है। आशा है अघोरेश्वर महाप्रभु के इन अमूल्य आशीर्वचनों को हृदयंगम कर हम आत्मपरिष्कार के पावन पथ की यात्रा का प्रारम्भ करेंगे।

यद्यपि अघोरेश्वर महाप्रभु आज सशरीर हमारे मध्य नहीं हैं किंतु उनके आशीर्वचन एवं वाणियाँ तथा अमूल्य विचार हमारी धरोहर हैं। यह आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने आज से 40 वर्ष पूर्व थे बल्कि आज की परिस्थितियों में इनकी महत्ता और अधिक बढ़ गई है। इनके चिंतन मनन और अनुशीलन द्वारा हम न केवल अपने जीवन को आलोकित कर सकते हैं बल्कि समाज, देश और विश्व को भी श्रेष्ठतर बना सकते हैं।

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