Thursday, September 20, 2018
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स्कूल छोड़ रहे बच्चों की खोज खबर नही ले प्रहा रशासन, शिक्षा व्यवस्था का बुरा हाल

 

 

बस्तर से धर्मेन्द्र सिंह की मुनादी ।।

 

छतीसगढ़ में शिक्षा के लिए करोड़ो खर्च किये जा रहे हैं और शिक्षा का अधिकार के नारे हर जगह पर दिखाई देता है लेकिन सुकमा जिले के नक्सली प्रभावित इलाकों के आदिवासी बच्चो को शिक्षा का अधिकार नही मिल पा रहा है। शाला त्यागी बच्चों की ऊई खबर नहीं ली जा रही ।

सुकमा जिले के प्रतिभा ने बताया कि एक दिन रात को वह घर मे सोई थी तभी उसको मिरगी आगई और उसका हाथ पूरी तरह से जल गया और उसका हाथ ही काटना पड़ गया। इस बीच उसकी पढ़ाई भी छूट गयी।  प्रतिभा का हाथ समय पर इलाज नही मिलने के कारण जिला अस्पताल लाने के बाद डॉक्टरों को काटना पड़ा वह एक माह से अस्पताल में है उसके चाचा कभी कभी आकर उसके साथ रहते है । प्रतिभा ने बताया कि वह केरतोग आश्रम में पढ़ती थी अब वहां नही पड़ना चाहती है क्योंकि वहाँ उसकी दीदी की मोत होगई थी वहा उसको डर लगता है वही 4 महीने से आश्रम में पढ़ने नही जा रही है।  प्रतिभा की आगे पड़ने की इच्छा तो है पर हाथ ठीक हो जाये तो में स्कूल जाऊ वही डॉक्टर बी के सिन्हा जिला अस्पताल ने बताया कि प्रतिभा जब यहाँ आई थी तब उसके हाथ मे इन्फ़ेक्सन हो गया था और उसका हाथ काटना पड़ा अभी उसके हाथ की सर्जरी होगी और पूरी तरह से ठीक होने के बाद उसको कृत्रिम हाथ लगाया जाएगा ।   यू तो बच्चो को अधिकार को लेकर सविधान में बच्चो के लिए अधिकारों के लिए धराये भी है बच्चो को उनको मिलना ही चाहिए ले किन जमीनी ईस्टर में इसका पालन नही होता है आज प्रतिभा को उसको स्कूल में होती लेकिन 4 महीने से ना उसकी टीचर ने खबर ली ना ही प्रसासन ने की बच्ची 4 महीने से आश्रम में नही जा रही है। आखिर जिले में कितने ऐसे प्रतिभा होंगे जो आज शिक्षा से  वंचित होंगे। वही सविधान में  बच्चों के लिए धाराएं है 12,13 ,14,15,16,17,24,28,29,31,42 ,3,6,7,8 जिसमे बच्चो को उनको अधिकार सविधान देता है। वही प्रतिभा ने मुनादी सवादाता से कहा कि में आगे पढ़ना चाहती हूं । में भी बड़े हो कर गुरुजी बनना चाहती हूँ बच्ची की सपने पुरा हो ।

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