Thursday, January 18, 2018
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हाल-ए-आर टी ओ :ऑटो रिक्शा के लिए नियम तो कई हैं लेकिन यहां सारे नियम फेल ….

रायपुर मुनादी ।।

ऑटो रिक्शा के लिए कई नियम, पर पालन कराने में पुलिस-आरटीओ फेल

 

रायपुर। राजधानी में संचालित 10 हजार से अधिक ऑटो रिक्शा की वजह से ध्वस्त हो रहे ट्रैफिक व्यवस्था को व्यस्थित करने का काम सालों से ट्रैफिक पुलिस और आरटीओ मिलकर करता आया है। इसके लिए कई नियम भी बनाए, लेकिन हर बार नियमों का पालन कराने में पुलिस-आरटीओ फेल रहे। जब भी पुलिस ऑटो रिक्शा चालकों की मनमानी पर अंकुश लगाने की कोशिश करती है, सामने ऑटो यूनियन आड़े आ जाता है। यूनियन के दबाव में आखिरकार पुलिस को अपने कदम पीछे हटाने को मजबूर होना पड़ता है। इस तरह सारे आदेशों की हवा निकल जाती है।

 

रायपुर की ट्रैफिक व्यवस्था को बिगाड़ने में सबसे बड़ा हाथ ऑटो रिक्शा का है। चालक कहीं भी ऑटो खड़े कर सवारी बैठाते- उतारते हैं। इसकी वजह से हर जगह जाम लगता है। ट्रैफिक पुलिस और आरटीओ ने ऑटो रिक्शा चालकों की मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए सालों से ऑटो चालकों का वेरिफिकेशन, ऑटो स्टैंड, 10 साल से अधिक पुराने ऑटो को परमिट जारी न करने और सड़क से हटाने, जारी परमिट के अनुसार शहरी व ग्रामीण ऑटो का रूट तय करने, शहर की आबादी के अनुसार ऑटो को चलाने, ऑटो का मालिक ही ऑटो चलाएं, किराए पर बाहरी लोगों को न दें, लाइसेंस वाले ही ऑटो चलाएं, एक व्यक्ति को एक से अधिक ऑटो न खरीदने के अलावा कई प्लान बनाए, लेकिन सारे प्लान ऑटो यूनियन के विरोध के आगे लागू नहीं हो सके। इसके चलते समस्या सालों से जस की तस बनी हुई है और आम लोग आज भी जाम से रोज जूझ रहे हैं। ऑटो चालक यात्रियों से दुर्व्यव्यहार, मारपीट करने से भी बाज नहीं आ रहे हैं।

रायपुर में ऑटो रिक्शा, मिनीडोर की संख्या 12 हजार से अधिक है। शहर के अलावा ग्रामीण परमिट वाले ऑटो भी शहर के भीतर दौड़ रहे हैं। चालक कहीं भी ऑटो पार्क कर देते हैं। हालांकि पिछले छह महीने से पुलिस ने अभियान चलाकर बेतरतीब ढंग से पार्क करीब ढाई सौ ऑटो रिक्शा को जब्त करने के साथ ही चालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है, बावजूद इसके ऑटो चालकों की मनमानी जारी है।

 

राजधानी में यातायात का दबाव लगातार बढ़ रहा है, ऑटो, मिनीडोर के अलावा सिटी बस शहर के मध्य से चल रहे हैं। अन्य जिलों से संचालित बसों को शहर के बाहर ही बस स्टैंड बनाकर रोका जा सकता है और वहीं से वापस भेजा जा सकता है।  ट्रैफिक पुलिस ने कई बार इसका प्लान बनाया, लेकिन यह धरा का धरा रह गया।

 

अमले की कमी का रोना रो रहे हैं

 

प्रभारी आरटीओ पुलक भट्टाचार्य ने बताया कि शहर में 10 हजार से अधिक ऑटो रिक्शा चल रहे हैं, लेकिन परमिट लेने व फिटनेस जांच कराने 3 हजार ऑटो ही 3 साल से दफ्तर आ रहे हैं। यानी 7 हजार ऑटो रिक्शा 15 साल पुराने होने के साथ अवैध रूप से सड़क पर दौड़ रहे हैं। अमले की कमी की वजह से ऑटो रिक्शा की नियमित जांच नहीं हो पा रही है, लेकिन ट्रैफिक पुलिस के साथ मिलकर जांच अभियान चलाया जाएगा।

 

“जिनके पास एलो कार्ड नही उनपर होगी कड़ी कार्यवाही”

 

एडिशनल एसपी ट्रैफिक बलराम हिरवानी ने बताया कि10 हजार ऑटो रिक्शा व उनके चालकों की जानकारी अपडेट की जा रही है। अभी तक 6 हजार ऑटो रिक्शा का डाटा जुटाया गया है। जल्द ही जांच अभियान चलाकर ऑटो रिक्शा व उनके चालकों के दस्तावेजों की जांच की जाएगी। जिनके पास यलो कार्ड नहीं होगा, उन पर सख्ती से कार्रवाई की जाएगी।

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