Tuesday, February 20, 2018
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मानव अधिकार आयोग ने  रायपुर नगर निगम के विरूद्ध किया प्रकरण पंजीबद्ध

 

 

रायपुर मुनादी।।

रायपुर नगर पालिक निगम द्वारा  ग्राम सकरी  रायपुर  में 27 हेक्टर भूमि पर प्रस्तावित कचरा डंपिंग यार्ड के विरोध में दायर की गई शिकायत पर छत्तीसगढ़ मानव अधिकार आयोग ने 09 जनवरी 2018 को प्रकरण पंजीबद्ध कर आयुक्त नगर पालिका निगम रायपुर से  जवाब मांगा है।

 

मानव अधिकार आयोग में की गई शिकायत में क्षेत्र के निवासी शिकायतकत्र्ता ब्यास मुनी द्विवेदी ने बताया है कि सकरी में प्रस्तावित डंपिंग यार्ड अर्थात् भूमि भरण स्थल के चारों तरफ हाउसिंग बोर्ड की कुछ रहवासी कालोनी, कुछ ही मीटर दूर पर पहले से ही बनी थी, जिसमें बड़ी संख्या में रहवासी निवास करते है। इसी प्रकार भूमि भरण स्थल के आसपास बड़े-बडे़ गाॅंव है। मुख्य रूप से हाऊसिंग बोर्ड, पिरदा में 2000 फ्लेट (दूरी 500 मीटर), हाऊसिंग बोर्ड धनसुली में 222 मकान (दूरी 300 मीटर), एल.आई.जी. हाऊसिंग बोर्ड कालोनी में 587 मकान (दूरी 500 मीटर), संस्कार सिटी में 212 मकान (दूरी 100 मीटर), अन्य गाॅव धनसुली, तुलसी, बाराडेरा, सकरी, पिरदा भूमि भरण स्थल के चारों ओर है। भूमि भरण स्थल को पर्यावरण स्वीकृत 2 अगस्त 2016 को दी गई जबकि पहले से ही उसके आसपास लाखों की संख्या में जनसंख्या निवासरत है।

 

शिकायत में बताया गया है कि नगर पालिका निगम ने सकरी में प्लांट लगाने हेतु निविदा जारी कर ठेका दिल्ली की कंपनी को रू. 1920/- प्रति मीट्रिक टन की दर से देने हेतु कार्यवाही चालू कर दी है। यह कंपनी सकरी स्थित भूमि भरण स्थल पर कचरा इकट्ठा करेगी जो कि 2.50 लाख टन प्रति वर्ष होगा तथा प्रतिवर्ष बढ़ता रहेगा।

 

इस प्रकार नगर पालिका निगम, पूर्व से ही स्थापित सकरी के आसपास की कई कालोनियों तथा गावों के मध्य भूमि भरण स्थल पर कचरा इकट्ठा करना चालू करने वाला है, जिससे चारों तरफ गंदगी का वातावरण रहेगा, वायु अत्यंत प्रदूषित हो जावेगी। गर्मियों में कचरे में आग लगने से वायु अत्यंत प्रदूषित हो जावेगी। वाहन जिसमें कचरा लाया जावेगा, वे सैकड़ों की संख्या में रहेंगे, जिनके आने-जाने से तथा रास्ते में कचरा गिराए जाने से रहवासियों को गंदगी के मध्य रहना पडे़गा। इस सब कारणों से, रहवासियों का, स्वच्छ व स्वास्थ्यवर्धक वातावरण में रहने के भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 में प्रदत्त मौलिक मानव अधिकारों का हनन होगा।

 

शिकायत में नगर पालिका निगम, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, आवास एवं पर्यावरण विभाग के विरूद्ध लाखों रहवासियों के मानव अधिकार हनन का मामला दर्ज कार्यवाही करने की मांग की गई है।

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