Wednesday, December 19, 2018
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इस शहर की 200 से ज्यादा महिलाओं ने नहीं कि शादी, अकेले ही बनाया अपना मुकाम

रायगढ मुनादी ।।

जिस समाज में यह मिथक हो कि पुरुष के बिना नारी का अस्तित्व ही नहीं है उस परिवेश में यदि महिलाएं अविवाहित रह जाएं तो इससे बड़ा सामाजिक बदलाव और क्या होगा। यहां के कई महिलाओं ने विवाह जैसी संस्था के औचित्य को आत्मसात ही नहीं किया। समाज में हालांकि अविवाहित महिलाओं में सामाजिक सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा होता है, पर इन महिलाओं ने शान से समाज में अविवाहित रहकर भी अपना अहम मुकाम बनाया है।

जी हां ! रायगढ़ शहर में करीब 200 महिलाएं ऐसी हैं जिन्होंने विवाह ही नहीं किया और अपना स्वतंत्र अस्तित्व को कायम रखा। एक NGO अस्मिता ने अपने सर्वेक्षण में 5 साल पहले यह आंकडा पाया था और इसे महिला सशक्तिकरण के लिए आदर्श शहर माना था। इन महिलाओं ने अपने बल पर अपने अपने क्षेत्रों में अपना मुकाम भी स्थापित किया है। उन्होंने जब अपने इरादे साबित करके दिखा दिए तब समाज भी रास्ता में रोड़ा नहीं बना, यहां तक कि सुरक्षा को लेकर भी कभी इन्हें संघर्ष नहीं करना पड़ा। इसके पीछे स्थानीय लोगों का व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर दृढ़ समर्थन भी है। सबकी कहानी अलग, सबके अविवाहित रहने के कारण अलग, सबकी उम्र अलग लेकिन इन सबके अंदर एक बात जो समान है वो है इनकी हिम्मत, खुद्दारी, जीने का अपना नजरिया। यदि महिला सशक्तिकरण को धरातल पर देखना हो तो इन्हें देखिए।
रायगढ़ शहर हालांकि नगर निगम है लेकिन यहां का परिवेश अभी भी कस्बाई ही है। इस परिवेश में सामाजिक मान्यताएं और उनका पालन अहम होता है लेकिन उससे उलट यदि कोई कदम उठाया जाता है समाज का नजरिया कुछ और ही होता है, लेकिन इस मामले में न तो सामाजिक नजरिया इनके निश्चय के आड़े आया और न ही इन्हें सामाजिक सुरक्षा की फिक्र हुई। इन महिलाओं में से ज्यादातर को लोग बहुत ही सम्मान की नजर से देखते हैं, उसका अहम कारण है उनका मुकाम और समाज के निर्माण में उनका योगदान।

फिर भी बेटी बचाओ

इसके बावजूद इस जिले में बेटियों की गिरती संख्या चिंतित करती है। यहां लैंगिक अनुपात 0 से 6 वर्ष के बच्चों का 1000 में 912 ही है। यही कारण है कि भारत सरकार ने भारत के 100 बेटी बचाओ जिला में इस जिले को भी रखा है। इससे पहले रायगढ़ के पूर्व कलेक्टर आरएस विश्वकर्मा ने सार्वजनिक रूप से जिले को महिला सशक्तिकरण के लिए आदर्श बताया था।

देखिये इनकी खुद्दारी

मुनादी डॉट कॉम की टीम ने 8 लोगों से व्यक्तिगत रूप से बात भी की है। इन सबका नाम देना मुनासिब नही लगता लेकिन हम में से कई इन्हें जानते हैं। ये भी जानते है कि कैसे इन्होंने संघर्ष किया है। मुनादी इन महिलाओं को और साथ ही उस शहर को भी सलाम करती है जहां इन्हें सशक्त होने का अवसर मिला।

 

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