Monday, January 21, 2019
Home > Slider > मच्छरों को पनपने से रोकना है मलेरिया और डेंगू के बचाव का है उपाय इस गंभीर मुद्दे पर कहां हुई बैठक जानने के लिए पढ़िए

मच्छरों को पनपने से रोकना है मलेरिया और डेंगू के बचाव का है उपाय इस गंभीर मुद्दे पर कहां हुई बैठक जानने के लिए पढ़िए

धरमजयगढ़ मुनादी। असलम खान

 

जिले के धरमजयगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यकर्ताओं को बताया गया कि अपने आसपास के क्षेत्र में मच्छरों को पनपने ही न दें ऐसा कुछ अपने को काम करना है और यही मच्छर मलेरिया और डेंगू जैसी गंभीर बीमारी की देन हैं, जरूरत है तो बस इतना कि हम ऐसा कुछ करें कि हमारे आसपास में मच्छर ही पनप नहीं सकें।

दरअसल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अंतर्गत इंटर्नी चिकित्सक डॉ एनानं खान ने महिला एवं बाल विकास विभाग के अंतर्गत प्रशिक्षण लेने आये हए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को डेंगू के सम्बंध में महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए बतलाया कि ,
बरसात के मौसम में अपने आवास के आस पास तथा नाली आदि की पर्याप्त साफ सफाई किया जाना चाहिए ताकि गंदगियों के कारण बीमारी फैलाने वाले मक्खी मच्छर आदि न पनप सके।सामान्यता साफ सफाई के अभाव में मच्छर पनपते हैं जिससे मलेरिया वा डेंगू होने की संभावना बनी रहती हैं। डेंगू के मच्छर स्वच्छ पानी मे पनपते है।
मादा aedes aegypti मच्छर के काटने से डेंगू नामक बीमारी होती हैं।शुरुआत में सामान्य सा लगने वाला डेंगू बुखार देरी या गलत उपचार से जानलेवा साबित हो सकता है इसलिए समय रहते उपचार कराना चाहिए।
इस मच्छर के शरीर में चीते जैसी धारियांहोती हैं ये मच्छर दिन में खासकर सुबह काटते हैं।
जुलाई से अक्टूबर माह में यह मच्छर ज्यादा फैलता है क्योंकि इस समय मच्छरों के पनपने की अनुकूल परिस्थितियां होती हैं।डेंगू बुखार में जलन ताप सर्दी जुकाम आंत्र शोथ उल्टी दस्त जैसे सामान्य लक्षणों के साथ साथ अत्याधिकसिर दर्द,तेज ठंड और बुखार, हल्की खांसी गले में दर्द और खराश,थकावट, भूख ना लगना, कमजोरी उल्टी, मांसपेशियोंऔर जोड़ों में दर्द, चकते ,आखो के पीछे दर्द ,हड्डियों में दर्द आदि लक्षण मिलते हैं।
इलाज में देरी या लापरवाही बरतने के कारण इस बीमारी में खून में प्लेटलेटसकाउंट कम होने लगता है तथा गम्भीर अवस्था मे कई महत्वपूर्ण जैविक अंग भी इन्फेक्टेड हो जाते है अथवा निष्क्रिय हो जाते है अर्थात अपना कार्य करना भी बंद कर देते हैं
डेंगू में इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि हमें एस्पिरिन ,डिस्प्रिन जैसे गोलियों का भूलकर भी प्रयोग नहीं करना चाहिए। बुखार को कम करने के लिए पैरासिटामोल का प्रयोग करना चाहिए।
डेंगू बुखार तीन प्रकार के होते हैं
Classical dengue fever
Dengue hemorrhagic fever
Dengue shock syndrome
Classical dengue बुखार में जान नहीं जाती ये साधारण इलाज से ठीक हो जाता है किन्तु hemorrhagic और shock syndrome डेंगू में उपचार नहीं होने से खतरा बढ़ सकता है।
हमें डेंगू के लक्षण जब दिखे तत्काल डॉक्टर से संपर्क कर डेंगू की जांच करवाना चाहिए और डेंगू की पुष्टि होने पर सावधानी पूर्वक उपचार करवाना चाहिए।
डेंगू के मरीज को ज्यादा से ज्यादा तरल पेय पदार्थ जैसे नारियल पानी,जूस आदि प्रयोग करना ताकि शरीर मे पानी की कमी न हो तथा चिकित्सक के परामर्श पर मरीज को पपीते के पत्ते पीस कर दिया जा सकता है।
मच्छरों से बचने के लिए पूरे आस्तीन के कपड़े पहना, गमले टायर आदि में पानी को इकठ्ठा नहीं होने देना , खिड़खियो में जाली लगने आदि से भी कुछ हद तक डेंगू के मच्छरों से बचा जा सकता है।

बैठक के अंत में उपस्थित सभी लोगों को फिर से एक बार कहा गया कि ऐसा कुछ करो की आसपास में मच्छर पनप ही न सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *