Monday, December 10, 2018
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यहां तो कोई भी आदमी कूड़े के ढेर पर खड़ा होकर नेता बन जा रहा है- प्रोफेसर अपूर्वानंद

 

रायगढ़ मुनादी ।।

 

 

 

तोडराम जोगी जन्मशताब्दी समारोह में शामिल होने आए दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अपूर्वानंद में अपने उद्बोधन में गांधी दर्शन पर ऐतिहासिक तथ्यों के साथ अपनी बात रखी। उन्होंने वर्तमान परिवेश में गांधी की प्रासंगिकता और उपयोगिता पर भी प्रकाश डाला।
दरअसल मजदूर नेता स्वर्गीय तोडराम जोगी के जन्मशताब्दी पर मुख्यवक्ता के रूप में अपूर्वानंद ने समसायिक मुद्दों के संदर्भ में गांधीवाद को उद्धरित कर रहे थे। उन्होंने कहा गांधी के दर्शन में वह बात थी जिससे पूरी दुनिया प्रभावित हुई। उन्होंने जोर देकर कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन को यूरोप से भी समर्थन इसलिए मिल सका क्योंकि इस आन्दोलन में मानवतावाद सर्वोपरि था। उन्होंने कहा मानवतावाद हमारी विशेषता है , यह इसलिए भी क्योंकि हम बहुलतावादी देश में रहते हैं। बंटवारा के बाद हमें दुर्भाग्य से ऐसा पड़ोस नहीं मिला लेकिन धर्मनिरपेक्षता और बहुलता हमारी पहचान रही है। उन्होंने कहा गांधी इसीलिए मार्टिन लूथर और नेलशन मंडेला के आदर्श बन जाते हैं।
मतदान के अधिकार की बात करते हुए उन्होंने कहा भारत पहला लोकतांत्रिक देश है जहां बिना भाषा, शिक्षा, जाति, धर्म के भेद के सबको मतदान का अधिकार है जो दुनिया भर के लिए दिलचस्प है। उन्होंने यह जोड़ा की अब कई सरकारें ऐसी नियम बना रही है जिससे लोगों का यह अधिकार छिना जा रहा है। कई जगह शिक्षा, कहीं परिवार नियोजन तो अब कहीं स्वच्छता को आधार बना कर चुनाव चुनाव लड़ने के अधिकार से वंचित करने का प्रयास किया जा रहा है, जो हमारे संविधान के मूल आत्मा के विपरीत है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति से देश और राष्ट्र का निर्माण होता है और राष्ट्र किसी व्यक्ति के अधिकार को छीन या सीमित नहीं कर सकता। उन्होंने यह भी कहा कि कूड़े के ढेर पर खड़े हो जाने से कोई नेता नहीं बनता।
अंत में उन्होंने श्रोताओं के सवाल लिए उर कइयों को जवाब भी दिया हालांकि कई सवाल के जवाब उन्होंने नहीं दिए।

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