Tuesday, August 14, 2018
Home > Slider > कहीं दिखी संविलियन होने की ख़ुशी तो, कहीं दिखा संविलियन न होने का गम, नियम की पेचीदगी बना  रोड़ा

कहीं दिखी संविलियन होने की ख़ुशी तो, कहीं दिखा संविलियन न होने का गम, नियम की पेचीदगी बना  रोड़ा

 

 

जशपुर मुनादी ।।

 

 

विकासयात्रा के दौरान प्रदेश के मुखिया डॉ रमन सिंह द्वारा 10 जुलाई को सरगुजा की धरती से संविलियन की घोषणा के साथ ही शिक्षाकर्मीयों ने कई अरमान सजाने शुरू कर दिए थे। 1 जुलाई का दिन इनकी जिंदगी में एक नया सवेरा लेकर आया। वक्त बीतता गया और इसके साथ ही हालात भी बदलते गए। कैबिनेट में जब शिक्षाकर्मीयों के संविलियन पर मुहर लगी,तब पहला झटका 8 साल के बंधन का लगा जिससे हजारों शिक्षाकर्मी के चेहरे पर मायूसी की घटा छा गई। केबिनेट में मुहर लगने लगने के बाद से अब तक 6-7 आदेश संविलियन से सम्बंधित आ चुके हैं बावजूद इसके अभी भी कई मामले ऐसे हैं जिस पर प्रदेश भर में एक रूपता नहीं दिखाई दे रही है। इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि शिक्षाकर्मीयों के संविलियन के पूर्व राज्य शासन ने क्या तैयारी कर रखी थी। ताजा मामला है ई-कोष में पंजीयन का जहाँ 8 वर्ष की सेवा अवधी पूर्ण कर चुके शिक्षकों का पंजीयन किया जा रहा था जिसमें नया कर्मचारी कोड प्रदान किया जा रहा है। पर यहाँ भी ई-कोष के पेज पर साफ और सुनहरे अक्षरों से लिखा हुआ है कि *नोट:-पदग्रहण तिथि 01.07.2010 के पूर्व की होनी आवश्यक* इस एक लाईन के नोट ने कुछ शिक्षाकर्मीयों के लिए पेचीदगी बढ़ा दी है।
ऐसे शिक्षाकर्मी जिनकी नियुक्ति तिथि तो 30 जून 2010 है परन्तु इनका कार्यभार ग्रहण की तिथि जुलाई माह में है। इनको क्या पता था की महज 1 दिन देर से कार्यभार ग्रहण करने का अंजाम इतना दुखदायी होगा।
कांसाबेल विकास खण्ड में भी ऐसे शिक्षकों की संख्या 28 है जो इस पेंच में फँस गए हैं। इन्हें भी अपने संविलियन होने का बेसब्री से इंतजार है। पर इनके समस्या का हल विकासखण्ड स्तरीय आयोजित संविलियन शिविर में आये किसी भी अधिकारियों के पास नहीं था। दो दिनों तक अपनी बारी का इंतजार करते ये शिक्षक अब अपनी फरियाद नियोक्ता अधिकारी के समक्ष रखने वाले हैं।

अपने आवेदन में इन्होंने लिखा है कि “शिक्षक (पंचायत) संवर्ग जिनकी प्रथम नियुक्ति तिथि/आदेश तिथि 30.06.2010 है जो जुलाई 2010 में कार्यभार ग्रहण किये हैं,प्रथम नियुक्ति तिथि के आधार पर 01.07.2018 को 08 वर्ष की सेवा अवधी पूर्ण कर चुके हैं एवं विकासखण्ड की वरिष्टता सूचि में शामिल भी किया गया है किंतु संविलियन से वंचित हैं। श्रीमान जी से प्रार्थना है कि हमें स्कूल शिक्षा विभग में संविलियन प्रदान करने की कृपा करें।”
अब देखना दिलचस्प यह होगा कि जिले के नियोक्ता अधिकारी इस पूरे मामले पर क्या निर्णय लेते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *