Tuesday, November 20, 2018
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जशपुर पर मुख्यमंत्री का इतना ध्यान क्यों, प्यार जताने या असंतोष दबाने होता है दौरा, बहस शुरू

 

 

जशपुर मुनादी ।।

 

 

भारतीय जनता पार्टी के लिए छग में सबसे सुरक्षित माने जशपुर जिले के सभी तीनो सीटों को बचाने के लिए मुख्यमंत्री जशपुर लगातार दौरा कर रहे है । लोकसुराज हो या विकास यात्रा या दिसम्बर जनवरी में सरकार द्वारा योजनाओं का तिहार का आयोजन हो सरकार के मुखिया डॉ रमन सिंह जशपुर आये और जशपुर को करोड़ो -अरबों की सौगात दी। बताया जाता है कि पिछले 15 वर्षों में पहली दफा डॉ रमन ने जशपुर जिले का इतना सघन दौरा किया है । इसके पीछे की राजनीतिक लॉजिक को लेकर जिले और प्रदेश की राजनीति में दखल रखने वाले स्वतंत्र राजनीतिक पर्यवेक्षकों में एक साल से बहस छिड़ी हुई है । इनका मानना है कि पिछले महीने भारतीय जनता पार्टी द्वारा प्रदेश के 90 विधानसभाओ में करवाये गए सर्वेक्षण के दौरान जहां पूरे प्रदेश में पार्टी के विधायको की हालत पतली दिखी वही सर्वे में जशपुर जिले के तीनों सीट की सबसे खराब रिपोर्ट आयी । जानकार सूत्रों की माने तो यहां के तीनों बिधायक की कार्यशैली को लेकर स्थानीय लोगो मे भारी असन्तोष की रिपोर्ट आने के बाद सीएम और संघ दोनों के कान खड़े हो गए और तीनों सीट को सुरक्षित रखने की कवायद शुरू कर दी गई।इसी वर्ष पिछले महीनो में जिले के कई कोने से सरकार के खिलाफ असन्तोष सड़क पर आते दिखा। लोगो ने इतिहास में पहली बार भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ मुखर होकर विरोध करना शुरू किया इसके अलावे जिले के कोने से सरकार और पार्टी के खिलाफ बढ़ते असन्तोष पर राजनीतिक नियंत्रण का भी यहां के जनप्रतिनिधियों में भारी अभाव दिखा।मसलन ये कि जनाक्रोश और असन्तोष को दूर करने स्थानीय जनप्रतिनिधियो की पहल बेकार गयी या फिर इन्होंने जनता के बीच ही जाना मुनासिब नही समझा और जब जनता के बीच गए तो वहां से बैरंग लौटा दिए गए। इन परिस्थितियों को भांपते हुए सीधे सीएम को जिले की कमान सम्हालनी पड़ी और वर्तमान में जशपुर सरकार और संघ की विशेष नजर में है । यहां की हर राजनीतिक गतिविधियों में स्थानीय जनप्रतिनिधियो की भूमिका की आश छोड़ संघ खुद ही कमान सम्हालकर घूम रही है ।
जशपुर जिले की राजनीतिक परिस्थितियां वर्तमान में कैसी हैं ,सीएम के लगातार दौरे से परिस्थितियों में कितना अंतर आया यह तो फ़िलहाल क्लीयर नही है और न ही बगैर सूक्ष्म सर्वे के क्लीयर हो पाएगा लेकिन इतना तो तय है कि इस बार पार्टी यहां रिस्क लेने को कत्तई तैयार नही है लिहाजा पुराने चेहरों पर दांव नही खेलेगी और चेहरे बदले जाएंगे इसकी पूरी उम्मीद है।

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